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Tuesday, 16 December 2014

audio video editing



वीडियो एडिटिंग- शूटिंग के दौरान लिए गए अनचाहे शॉट्स को निकाल कर फायनल शॉट्स को इस तरह जोड़ा जाता है, कि वो एक कहानी लगे। वीडियो एडिटिंग पोस्ट प्रोडक्शन का हिस्सा है।
1. Adobe Premiere Pro CS6: This software is the best video editing software available without the need to buy specialized hardware. Adobe redesigned the user interface for this iteration of Premier Pro with the intent to remove all the obstacles in the way of the creative process. The redesign is successful, for the most part, without compromising the tools and features that put this product in first place.

2. Final Cut Pro X: Apple also recently revamped its signature video editing software. Final Cut Pro X is leaner and faster than previous iterations of the software. The new interface also makes the software more intuitive and accessible to new users. Innovative new features such as background rendering and the magnetic timeline set the standard for future generations of video editing applications.

3. Sony Vegas Pro 11: Sony's latest foray into video editing sees marked improvements over their past efforts. All the features and tools needed to create a great video project are present and functional. It has excellent integration with Sony hardware such as cameras and audio equipment. However, it just doesn't quite live up to the high standards set by Adobe and Apple.

साउंड मिक्सिंग- साउंड एडिटिंग या साउंड मिक्सिंग के बगैर कोई भी फिल्म, विज्ञापन, या सीरियल अधूरा होगा। किसी सीन में किसी आवाज़ को एक ही लेवल पर सेट करने की प्रक्रिया को कहते है साउंड एडिटिंग। इमोशनल सीन के बैकग्राऊंड में दुखी या रोमांटिक गाना हो, या एक्शन सीन में गिरने, मरने की आवाज़, ये सब साउंड एडिटिंग का कमाल है।
Audacity

Audacity is free, open source software for recording and editing sounds. It allows you to record live audio, converts tapes and records into digital recordings or CDs, edit Ogg Vorbis, MP3, WAV or AIFF sound files. You also can cut, copy, splice or mix sounds together with Audacity. Built-in effects are given to remove static, hiss, hum or other constant background noises.
WavePad Sound Editor

WavePad Sound Editor lets you make and edit music, voice and other audio recordings. When editing audio files you can cut, copy and paste parts of recordings and, if required, add effects like echo, amplification and noise reduction. WavePad works as a wav editor or mp3 editor but it also supports a number of other file formats including vox, gsm, real audio, au, aif, flac, ogg and more.

मल्टीमीडिया



मल्टीमीडिया अंग्रेजी के multi तथा media शब्दों से मिलकर बना है। Multi का अर्थ होता है 'बहु' या 'विविध' और Media का अर्थ है 'माध्यम'। मल्टीमीडिया एक माध्यम होता है जिसके द्वारा विभिन्न प्रकार की जानकारियों को विविध प्रकार के माध्यमों जैसे कि टैक्स्ट, आडियो, ग्राफिक्स, एनीमेशन, वीडियो आदि का संयोजन (combine) कर के दर्शकों/श्रोताओं (audience) तक पहुँचाया जाता है।
आजकल मल्टीमीडिया मीडिया का प्रयोग अनेक क्षेत्रों जैसे कि मल्टीमीडिया प्रस्तुतीकरण (Multimedia Presentation), मल्टीमीडिया गेम्स (Multimedia Games) में बहुतायत के साथ होता है क्योंकि मल्टीमीडिया किसी वस्तु के प्रस्तुतीकरण का सर्वोत्तम साधन है।
मल्टीमीडिया का व्यावसायिक प्रयोग
रचनात्मक उद्योगों में - रचनात्मक उद्योग ज्ञान, कला, मनोरंजन, पत्रकारिता आदि के लिये मल्टीमीडिया का प्रयोग करते हैं।
व्यापार में - व्यापारी विज्ञापन के लिये मल्टीमीडिया का प्रयोग करते हैं।
खेल तथा मनोरंजन में - यह तो हम सभी जानते हैं कि खेलों के लिये वीडियो गेम्स के रूप में मल्टीमीडिया का प्रयोग अत्यन्त लोकप्रिय है। सिनेमा जैसे मनोरंजन के क्षेत्र में स्पेशल इफैक्ट देने के लिये मल्टीमीडिया का प्रयोग किया जाता है।
शिक्षा के क्षेत्र में - विद्यार्थियों को आसानी के साथ कम से कम समय में शिक्षा प्रदान करने के लिये मल्टीमीडिया एक वरदान साबित हुई है।
ये तो मल्टीमीडिया के प्रयोग मात्र कुछ ही उदाहरण हैं वरना आज ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं होगा जिसमें मल्टीमीडिया का प्रयोग न किया जाता हो।
Multimedia means that computer information can be
represented through audio, video, and animation in addition to
traditional media (i.e., text, graphics/drawings, images).

एनीमेशन

एनीमेशन हरकत का भ्रम पैदा करने के लिए 2-डी या ३-डी कलाकृति या मॉडल छाविओं का तेज़ी से प्रर्दशित होने वाला एक अनुक्रम है। यह हरकत (motion) का प्रकाशिक भ्रम (optical illusion) दृष्टि के हठ (persistence of vision) के कारण है और भिन्न तरीकों से प्रर्दशित चलचित्र या वीडियो (video) कार्यक्रम एनीमेशन पेश करने की सबसे आम विधि है, हालांकि एनीमेशन पेश करने के और भी कई रूप हैं एनीमेशन कभी कभी एक समुदाय को सक्रिय करने का एक तरीका यानी उपभोग्कर्ता को 'जीवित करने' का उल्लेख है इस का अर्थ है क्रिया जो किसी दिए गए सेवा के साथ बातचीत करने के लिए उपयोगकर्ताओं को प्रोत्साहित करती हो और वह अनतिक्रम (moderation) से जुड़ी है।
A Flash animation or Flash cartoon is an animated film which is created by Adobe Flash or similar animation software and often distributed in the SWF file format. The term Flash animation not only refers to the file format but to a certain kind of movement and visual style. With dozens of Flash animated television series, countless more Flash animated television commercials, and award-winning online shorts in circulation, Flash animation is currently enjoying a renaissance.

With Adobe Flash, you can create artwork and animations that add motion and visualinterest to your Web pages. Flash movies can be interactive – users can click buttons orrollover images to stop, start, or move to another segment of the movie. You can createvector artwork using Flash or you can import graphics, music, and sounds into your Flashmovie. You animations are exported as Flash Player movies. These movies are compact,which allows for faster downloads on the WWW.

Tools

The Tools menu is probably the most used panel in Flash. In it are the tools needed to manipulate items on the stage. It can also be used to do actions on the timeline.
Flash toolbar.png
Here are the main tools and their uses;
  • Selection Tool (v) - Selecting whole objects and moving them.
  • Subselection Tool - Selecting partial objects.
  • Line Tool - Drawing straight lines.
  • Lasso Tool - Selecting irregular shaped pieces of an object
  • Pen Tool - Drawing non-straight and curved lines.
  • Text Tool (t) - Inputting a textbox onto the stage.
  • Oval Tool - Drawing oval and circle shapes. (Drag + Holding Shift = Circles)
  • Shape Tool - By default draws rectangles. (Drag + Holding Shift = Squares)
  • Pencil Tool - Free drawing thin lines.
  • Brush Tool- Free drawing brush shapes.
  • Free Transform - Scale, rotate, and skew an object.
  • Fill Transform - Distort the gradient fill of an object.
  • Stroke Tool - Change the color and size of a stroke.
  • Fill Tool - Change the color of a fill.
  • Eyedropper - Sample a color from the stage.
  • Eraser - Use a brush to erase parts of an object.
  • Hand Tool - Move the stage around if it is not all visible.
  • Zoom - Zoom in or out.


वेब पत्रकारिता

वेब पत्रकारिता लेखन व भाषा 

वेब पत्रकारिता, प्रकाशन और प्रसारण की भाषा में आधारभूत अंतर है। प्रसारण व वेब-पत्रकारिता की भाषा में कुछ समानताएं हैं। रेडियो/टीवी प्रसारणों में भी साहित्यिक भाषा, जटिल व  लंबे शब्दों से बचा जाता है। आप किसी प्रसारण में, 'हेतु, प्रकाशनाधीन, प्रकाशनार्थ, किंचित, कदापि, यथोचित इत्यादि' जैसे शब्दों का उपयोग नहीं पाएँगे।   कारण?  प्रसारण ऐसे शब्दों से बचने का प्रयास करते हैं जो उच्चारण की दृष्टि से असहज हों या जन-साधारण की समझ में न आएं। ठीक वैसे ही वेब-पत्रिकारिता की भाषा भी सहज-सरल होती है।
वेब का हिंदी पाठक-वर्ग आरंभिक दौर में अधिकतर ऐसे लोग थे जो वेब पर अपनी भाषा पढ़ना चाहते थे, कुछ ऐसे लोग थे जो विदेशों में बसे हुए थे किंतु अपनी भाषा से जुड़े रहना चाहते थे या कुछ ऐसे लोग जिन्हें किंहीं कारणों से हिंदी सामग्री उपलब्ध नहीं थी जिसके कारण वे किसी भी तरह की हिंदी सामग्री पढ़ने के लिए तैयार थे। आज परिस्थितिएं बदल गई हैं मुख्यधारा वाला मीडिया आनलाइन उपलब्ध है और पाठक के पास सामग्री चयनित करने का विकल्प है।
इंटरनेट का पाठक अधिकतर जल्दी में होता है और उसे बांधे रखने के लिए आपकी सामग्री पठनीय, रूचिकर व आकर्षक हो यह बहुत आवश्यक है। यदि हम ऑनलाइन समाचार-पत्र की बात करें तो भाषा सरल, छोटे वाक्य व पैराग्राफ भी अधिक लंबे नहीं होने चाहिएं।

विशुद्ध साहित्यिक रुचि रखने वाले लोग भी अब वेब पाठक हैं और वे वेब पर लंबी कहानियां व साहित्य पढ़ते हैं। उनकी सुविधा को देखते हुए भविष्य में साहित्य डाऊनलोड करने का प्रावधान अधिक उपयोग किया जाएगा ऐसी प्रबल संभावना है।  साहित्यि क वेबसाइटें स्तरीय साहित्यका प्रकाशन कर रही हैं और वे निःसंदेह साहित्यिक भाषा का उपयोग कर रही हैं लेकिन उनके पास ऐसा पाठक वर्ग तैयार हो चुका है जो साहित्यिक भाषा को वरियता देता है।
सामान्य वेबसाइट के पाठक जटिल शब्दों के प्रयोग व  साहित्यिक भाषा से उकता जाते हैं और वे आम बोल-चाल की भाषा अधिक पसंद करते हैं अन्यथा वे एक-आध मिनट ही साइट पर रूककर साइट से बाहर चले जाते हैं।

सामान्य पाठक-वर्ग को बाँधे रखने के लिए आवश्यक है कि साइट का रूप-रंग आकर्षक हो, छायाचित्र व ग्राफ्किस  अर्थपूर्ण हों, वाक्य और पैराग्राफ़ छोटे हों, भाषा सहज व सरल हो। भाषा खीचड़ी न हो लेकिन यदि उर्दू या अंग्रेज़ी के प्रचलित  शब्दों का उपयोग करना पड़े तो इसमें कोई बुरी बात न होगी। भाषा सहज होनी चाहिए शब्दों का ठूंसा जाना किसी भी लेखन को अप्रिय बना देता है।

न्यू मीडिया



इंटरनेट के प्रचार-प्रसार और निरंतर तकनीकी विकास ने एक ऐसी वेब मीडिया को जन्म दिया, जहाँ अभिव्यक्ति के पाठ्य, दृश्य, श्रव्य एवं दृश्य-श्रव्य सभी रूपों का एक साथ क्षणमात्र में प्रसारण संभव हुआ। यह वेब मीडिया ही ‘न्यू मीडिया’ है, जो एक कंपोजिट मीडिया है, जहाँ संपूर्ण और तत्काल अभिव्यक्ति संभव है, जहाँ एक शीर्षक अथवा विषय पर उपलब्ध सभी अभिव्यक्‍तियों की एक साथ जानकारी प्राप्त करना संभव है, जहाँ किसी अभिव्यक्ति पर तत्काल प्रतिक्रिया देना ही संभव नहीं, बल्कि उस अभिव्यक्ति को उस पर प्राप्त सभी प्रतिक्रियाओं के साथ एक जगह साथ-साथ देख पाना भी संभव है। इतना ही नहीं, यह मीडिया लोकतंत्र में नागरिकों के वोट के अधिकार के समान ही हरेक व्यक्ति की भागीदारी के लिए हर क्षण उपलब्ध और खुली हुई है।

'न्यू मीडिया' संचार का वह संवादात्मक (Interactive)स्वरूप है जिसमें इंटरनेट का उपयोग करते हुए हम पॉडकास्ट, आर एस एस फीड, सोशल नेटवर्क (फेसबुक, माई स्पेस, ट्वीट्र), ब्लाग्स, विक्किस, टैक्सट मैसेजिंग इत्यादि का उपयोग करते हुए पारस्परिकसंवाद स्थापित करते हैं। यह संवाद माध्यम बहु-संचार संवाद का रूप धारण कर लेता है जिसमें पाठक/दर्शक/श्रोता तुरंत अपनी टिप्पणी न केवल लेखक/प्रकाशक से साझा कर सकते हैं, बल्कि अन्य लोग भी प्रकाशित/प्रसारित/संचारित विषय-वस्तु पर अपनी टिप्पणी दे सकते हैं। यह टिप्पणियां एक से अधिक भी हो सकती है अर्थात बहुधा सशक्त टिप्पणियां परिचर्चा में परिवर्तित हो जाती हैं। उदाहरणत: आप फेसबुक को ही लें - यदि आप कोई संदेश प्रकाशित करते हैं और बहुत से लोग आपकी विषय-वस्तु पर टिप्पणी देते हैं तो कई बार पाठक-वर्ग परस्पर परिचर्चा आरम्भ कर देते हैं और लेखक एक से अधिक टिप्पणियों का उत्तरदेता है।
न्यू मीडिया वास्तव में परम्परागत मीडिया का संशोधित रूप है जिसमें तकनीकी क्रांतिकारी परिवर्तन व इसका नया रूप सम्मलित है।

न्यू मीडिया संसाधन
न्यू मीडिया का प्रयोग करने हेतु कम्प्यूटर, मोबाइल जैसे उपकरण जिनमें इंटरनेट की सुविधा हो, की आवश्यकता होती है। न्यू मीडिया प्रत्येक व्यक्ति कोविषय-वस्तु का सृजन, परिवर्धन, विषय-वस्तु का अन्य लोगों से साझा करने का अवसर समान रूप से प्रदान करता है। न्यू मीडिया के लिए उपयोग किए जाने वाले संसाधन अधिकतर निशुल्क या काफी सस्ते उपलब्ध हो जाते हैं।

न्यू मीडिया का भविष्य
यह सत्य है कि समय के अंतराल के साथ न्यू मीडियाकी परिभाषा और रूप दोनो बदल जाएं। जो आज नया है संभवत भविष्य में नया न रह जाएगा यथा इसे और संज्ञा दे दी जाए। भविष्य में इसके अभिलक्षणों में बदलाव, विकास या अन्य मीडिया में विलीन होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
न्यू मीडिया ने बड़े सशक्त रूप से प्रचलित पत्रकारिता को प्रभावित किया है। ज्यों-ज्यों नई तकनीक,आधुनिक सूचना-प्रणाली विकसित हो रही है त्यों-त्योंसंचार माध्यमों व पत्रकारिता में बदलाव अवश्यंभावी है।


वेब पत्रकारिता लेखन व भाषा

वेब पत्रकारिता, प्रकाशन और प्रसारण की भाषा में आधारभूत अंतर है। प्रसारण व वेब-पत्रकारिता की भाषा में कुछ समानताएं हैं। रेडियो/टीवी प्रसारणों में भी साहित्यिक भाषा, जटिल व लंबे शब्दों से बचा जाता है। आप किसी प्रसारण में, 'हेतु, प्रकाशनाधीन, प्रकाशनार्थ, किंचित, कदापि, यथोचित इत्यादि' जैसे शब्दों का उपयोग नहीं पाएँगे। कारण? प्रसारण ऐसे शब्दों से बचने का प्रयास करते हैं जो उच्चारण की दृष्टि से असहज हों या जन-साधारण की समझ में न आएं। ठीक वैसे ही वेब-पत्रिकारिता की भाषा भी सहज-सरल होती है।
वेब का हिंदी पाठक-वर्ग आरंभिक दौर में अधिकतर ऐसे लोग थे जो वेब पर अपनी भाषा पढ़ना चाहते थे, कुछ ऐसे लोग थे जो विदेशों में बसे हुए थे किंतु अपनी भाषा से जुड़े रहना चाहते थे या कुछ ऐसे लोग जिन्हें किंहीं कारणों से हिंदी सामग्री उपलब्ध नहीं थी जिसके कारण वे किसी भी तरह की हिंदी सामग्री पढ़ने के लिए तैयार थे। आज परिस्थितिएं बदल गई हैं मुख्यधारा वाला मीडिया आनलाइन उपलब्ध है और पाठक के पास सामग्री चयनित करने का विकल्प है।
इंटरनेट का पाठक अधिकतर जल्दी में होता है और उसे बांधे रखने के लिए आपकी सामग्री पठनीय, रूचिकर व आकर्षक हो यह बहुत आवश्यक है। यदि हम ऑनलाइन समाचार-पत्र की बात करें तो भाषा सरल, छोटे वाक्य व पैराग्राफ भी अधिक लंबे नहीं होने चाहिएं।

विशुद्ध साहित्यिक रुचि रखने वाले लोग भी अब वेब पाठक हैं और वे वेब पर लंबी कहानियां व साहित्य पढ़ते हैं। उनकी सुविधा को देखते हुए भविष्य में साहित्य डाऊनलोड करने का प्रावधान अधिक उपयोग किया जाएगा ऐसी प्रबल संभावना है। साहित्यि क वेबसाइटें स्तरीय साहित्यका प्रकाशन कर रही हैं और वे निःसंदेह साहित्यिक भाषा का उपयोग कर रही हैं लेकिन उनके पास ऐसा पाठक वर्ग तैयार हो चुका है जो साहित्यिक भाषा को वरियता देता है।
सामान्य वेबसाइट के पाठक जटिल शब्दों के प्रयोग व साहित्यिक भाषा से उकता जाते हैं और वे आम बोल-चाल की भाषा अधिक पसंद करते हैं अन्यथा वे एक-आध मिनट ही साइट पर रूककर साइट से बाहर चले जाते हैं।

सामान्य पाठक-वर्ग को बाँधे रखने के लिए आवश्यक है कि साइट का रूप-रंग आकर्षक हो, छायाचित्र व ग्राफ्किस अर्थपूर्ण हों, वाक्य और पैराग्राफ़ छोटे हों, भाषा सहज व सरल हो। भाषा खीचड़ी न हो लेकिन यदि उर्दू या अंग्रेज़ी के प्रचलित शब्दों का उपयोग करना पड़े तो इसमें कोई बुरी बात न होगी। भाषा सहज होनी चाहिए शब्दों का ठूंसा जाना किसी भी लेखन को अप्रिय बना देता है।
- रोहित कुमार 'हैप्पी'

न्यू मीडिया क्या है?
न्यू मीडिया और ऑनलाइन पत्रकारिता की नई माँगें
वेब पत्रकारिता की भाषा
न्यू मीडिया विशेषज्ञ या साधक
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न्यू मीडिया और ऑनलाइन पत्रकारिता की नई माँगें
नि:संदेह न्यू मीडिया बड़े सशक्त रूप से परंपरागतप्रचलित मीडिया को प्रभावित कर रहा है। आज पत्रकारों को न्यू मीडिया से जुड़ने के लिए नई तकनीक, आधुनिक सूचना-प्रणाली, सोशल-मीडिया, सर्च इंजन प्रवीणता और वेब शब्दावली से परिचय होना अति-आवश्यक हो गया है। केवल ब्लागिंग मात्र करने से आप संपूर्ण वेब-पत्रकार नहीं कहलाते। वेब-पत्रकारिता का क्षेत्र काफी विस्तृत है और आपको पत्रकारिता के अतिरिक्त वेब, मल्टीमीडिया, सर्च इंजन और उनकी कार्यप्रणाली व ग्रॉफिक की समझ होनी चाहिए। इन तत्वों के बिना भी आप न्यू मीडिया में काम तो कर सकते हैं परंतु एक सक्षम वेब पत्रकार के लिए इनमें प्रवीणता हासिल करना उपयोगी होगा।
आइए, देखें एक वेब पत्रकार के लिए किन-किन योग्यताओं की आवश्यकता होती है:
पत्रकारिता का ज्ञान
इंटरनेट का उपयोग
सर्च इंजन उपयोग में दक्षता
इंटरनेट इंवेस्टिगेश
एच टी एम एल ( html ) का आधारभूत ज्ञान
यदि हम हिंदी वेब पत्रकारिता में काम करना चाहते हैं तो हिंदी यूनिकोड का ज्ञान व हिंदी टंकण
ब्लागिंग जैसे वर्डप्रैस, गूगल ब्लाग्स इत्यादि
सर्च इंजन आप्टिमज़ैशन (एस सी ओ)
सी एम एस (कांटेंट मैनेजमैंट स्सिटम) जैसे जुमला, वर्ड प्रैस, सी एम एस एम एस इत्यादि
यू ट्यूब इत्यादि पर वीडियो अपलोड कैसे करे, मैटा टैग कैसे लिखे इत्यादि
बेसिक ग्रॉफिक का ज्ञान जैसे अडोबी फोटोशॉप पर फोटो को संपादित करना व उसे वेब के लिए तैयार करना
बेसिक वीडियो व ऑडीओ एडटिंग
पॉडकास्ट
आर एस एस फीड
सोशल नेटवर्क (फेसबुक, माई स्पेस, गूगल प्लस, ट्विटर),
विकिपीडिया
उपरोक्त अधिकतर योग्यताओं में यदि पूर्ण निपुणता न भी हो लेकिन इनका आधारभूत ज्ञान न होने पर वेब-पत्रकारिता का सफल होना संभव नहीं। हाँ, आप परंपरागत पत्रकारिता को ही वेब-पत्रकारिता कहते या समझते रहे तो अलग बात है।