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Tuesday, 22 November 2016

पत्रकारिता के क्षेत्र

पत्रकारिता के क्षेत्र
आज हमारे जीवन में विविधता आ गयी है साथ ही संचार साधनों की भी बहुलता हो गयी है। इसने पत्रकारिता को भी बहुआयामी बना दिया है। जीवन जगत के हर क्षेत्र में आज पत्रकारिता की घुसपैठ है। उसका विस्तार हर ओर है।

आर्थिक पत्रकारिता – आर्थिक जगत से जुड़ी खबरें इसके तहत आती हैं। भारत में पत्रकारिता की शुरुआत व्यापारिक सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए ही हुई थी। 29 जनवरी 1780 को कलकत्ता से प्रकाशित होने वाले भारत के पहले अखबार हिक्की गजट ने अपने पत्र के उद्देष्य के विषय में लिखा था- राजनीतिक और व्यापारिक साप्ताहिक, सभी पार्टियों के लिए खुला है लेकिन किसी से प्रभावित नहीं है। इससे स्पष्ट है कि अखबार का उद्देश्य व्यापारिक गतिविधियों की सूचना देना भी था।
आज आर्थिक मुद्दे लोगों के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पाठक और दर्शक भी आर्थिक गतिविधियों संबंधित खबरों में अत्यंत रूचि लेते है। इसलिए न सिर्फ अंग्रेजी बल्कि हिंदी में भी आर्थिक परिशिष्टों का प्रकाशन हो रहा है। देश के विभिन्न भागों से आज इकोनाॅमिक टाईम्स, बिजिनेस इंडिया, बिजनेस टूडे, दलाल, आदि जैसे आर्थिक दैनिक, साप्ताहिक अथवा मासिक का प्रकाशन होता हैं। खासकर व्यापार जगत की खबरों के लिए टाइम्स नाउ , जी बिजनेस आदि समाचार चैनल हैं। इसके अलावा नियमित खबरों में चाहे वे प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रानिक सबमें आर्थिक जगत से जुड़ी खबरों के लिए विशेष स्थान होता है।

अपराध पत्रकारिता- अपराध जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लिखना अपराध पत्रकारिता के तहत आता है। जो पत्रकार पुलिस बीट, आपराधिक मामलों को देखता है क्राइम रिपोर्टर कहलाता है। हत्या, चोरी -डकैती, लूटपाट की घटनाओं की खबर अपराध पत्रकारिता के तहत आती है।

संसदीय पत्रकारिता- संसद के दोनों सदनों, प्रादेशिक विधान सभाओं, परिषदों की कार्यवाही की खबर इसके तहत आते हैं। संसदीय पत्रकारिता करते हुए काफी सावधानी बरती जाती है, ताकि अवमानना का कोई प्रश्न न उठे। अधिकतर अनुभवी पत्रकारों को ही यह जिम्मेदारी दी जाती है। संसद की पत्रकार दीर्घा में देश के प्रतिष्ठित पत्रकार मौजूद रहते हैं।

महिला पत्रकारिता – महिलाओं से संबंधित सूचना, शिक्षा, एवं मनोरंजन या उनके हित से जुड़ी कोई खबर महिला पत्रकारिता है। आज नारी जगत से संबंधित पत्र पत्रिकाएं हैं। अखबारों मे भी उनके लिए अलग से परिषिष्ट दिए जाते हैं। लेकिन अक्सर यह समय काटने या मनोरंजन का साधन ही बनकर रह जाता है। क्योंकि इनमें श्रृंगार, फैशन, घर सजाने, पतियों को खुश रखने की कला आदि पर ही जोर रहता है। लेकिन इन सबके अलावा विज्ञान, खेल, राजनीति, साहित्य आदि में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनसे संबंधित कुप्रथाओं, उनके उत्पीड़न, शोषण आदि की खबर रखना ही सही मायने में महिला पत्रकारिता है।

बाल पत्रकारिता – बच्चों से जुड़ी गतिविधिओं की पत्रकारिता बाल पत्रकारिता है। उनकी जिज्ञासाओं की शांति के लिए रंग बिरंगे मनोरंजक रूप में, उन्हीं की भाषा में पत्र पत्रिकाएं होनी चाहिए। बच्चों के लिए हमेशा से पत्रिकाएं निकलती रहीं हैं। बालक, सुमन सौरभ चंपक, नन्दन, चन्दामामा, पराग, बालभारती आदि कई पत्रिकाएं विभिन्न आयुवर्ग के बच्चों की रूचि को ध्यान में रखते हुए निकाली जाती रहीं हैं। लगभग सभी पत्र पत्रिकाओं में इनके लिए साप्ताहिक /मासिक परिशिष्ट निकाले जाते हैं।

स्वास्थ्य पत्रकारिता - जन स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे लोगों के लिए अहम होते हैं। स्वास्थ्य पत्रकारिता केवल मेडिकल की ही नहीं बल्कि मेडिको सोशल पत्रकारिता भी कही जाती है। यहो सिर्फ समाचार ही नहीं बल्कि विचार और पुनर्विचार का भी काफी महत्व होता है। स्वास्थ्य पत्रकारिता के लिए तकनीकी और सही जानकारी बहुत जरूरी है। चिकित्सा क्षेत्र की कोई भी अधूरी या गलत जानकारी जानलेवा या भयावह साबित हो सकती है।

खेल पत्रकारिता - खेल जगत में लोगो की रूचि रहती है। इसके अद्यतन जानकारी के लिए लोग मीडिया पर नजर गड़ाए रहते हैं। राष्ट्रीय- अन्तर्राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर के खेल और खिलाड़ियों की खबर देने के साथ साथ इस क्षेत्र में चल रहे पहल, परिवर्तन, वाद विवाद की खबर देना भी खेल पत्रकारों का काम है। यही नहीं खेल से जुड़े संगठनों आदि की खबर पर भी खेल पत्रकारों की नजर होती है। अधिकांश पत्र पत्रिकाओं में खेल के लिए अलग स्थान सुनिश्चित होता है।

विज्ञान पत्रकारिता – विज्ञान मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित करता है। इसलिए विज्ञान पत्रकारिता का क्षेत्र व्यापक हुआ है। लोगों के विकास से जुटकर यह पत्रकारिता मानव जीवन को उन्नत बनाने को प्रयासरत है। थल, जल और वायु और इसमे होने वाली नित नई खोजों, हलचलों की खबरें देना विज्ञान पत्रकारिता के तहत आता है।

कला, संस्कृति और साहित्यिक पत्रकारिता – कला संस्कृति और सहित्य जगत से जुड़ी खबरे इसके तहत आती हैं। साहित्य और पत्रकारिता का सबंध पुराना है। सभी मीडिया इनके लिए स्थान सुनिश्चित रखती है। मनोरंजन जगत के लिए ढेर सारी पत्र पत्रिकाएं निकलती हैं।

ग्राम्य पत्रकारिता – हमारा देश गांवों का देश कहा जाता है। गांव की और गांव के लिए खबर हमारे पूरे देश के लिए मायने रखता है। उनकी जरूरतों और विकास से जुड़े मुद्दे सबके लिए महत्वपूर्ण हैं। गांवो से जुड़ी खबरों की जरूरत के बावजूद आज के बाजारवाद में ग्राम्य पत्रकारिता का स्थान मीडिया में धीरे धीरे कम गया है।

राजनीतिक पत्रकारिता – हमारा देश लोकतंत्र है और इसका चौथा खंभा कहा जाता है पत्रकारिता। राजनीति से जुड़ी खबरें आम लोगों के लिए भी काफी मायने रखती हैं। आज मीडिया की घुसपैठ हर राजनीतिक दल में है। हर मीडिया हाउस में न सिर्फ राजनीति एक अलग बीट होता है, बल्कि बड़े प्रकाशनों में तो महत्वपूर्ण दलों के अलग अलग बीट होते हैं। इनसे जुड़ी खबरें देना और उससे जुड़ी बातों का विश्लेषण करना भी पालिटिकल रिपोर्टर का काम होता है।

Friday, 29 July 2016

नेतृत्व (leadership)

नेतृत्व (leadership)
"नेतृत्व एक प्रक्रिया है जिसमें कोई व्यक्ति सामाजिक प्रभाव के द्वारा अन्य लोगों की सहायता लेते हुए एक सर्वनिष्ट (कॉमन) कार्य सिद्ध करता है।
शासन करना, निर्णय लेना, निर्देशन करना आज्ञा देना आदि सब एक कला है, एककठिन तकनीक है। परन्तु अन्य कलाओं की तरह यह भी एक नैसर्गिक गुण है।प्रत्येक व्यक्ति में यह गुण या कला समान नहीं होती है। उद्योग में व्यक्तिके समायोजन के लिए पर्यवेक्षण (supervision), प्रबंध तथा शासन का बहुतमहत्व होता है। उद्योग में असंतुलन बहुधा कर्मचारियों के स्वभाव दोष से हीनहीं होता बल्कि गलत और बुद्धिहीन नेतृत्व के कारण भी होता है। प्रबंधकअपने नीचे काम करने वाले कर्मचारियों से अपने निर्देशानुसार ही कार्यकरवाता है। जैसा प्रबंधक का व्यवहार होता है, जैसे उसके आदर्श होते हो, कर्मचारी भी वैसा ही व्यवहार निर्धारित करते हैं। इसलिए प्रबंधक का नेतृत्व जैसा होगा, कर्मचारी भी उसी के अनुरूप कार्य करेंगे।
नेतृत्व संगठनात्मक संदर्भों के सबसे प्रमुख पहलुओं में से एक है। हालांकि, नेतृत्व को परिभाषित करना चुनौतीपूर्ण रहा है।

नेतृत्व का अर्थ

कभी-कभी यदि कोई व्यक्ति शक्ति के आधार परदूसरों से मनचाहा व्यवहार करवा लेने की क्षमता रखते हो तो उसे भी नेतृत्वके अंतर्गत सम्मिलित किया जाता है। वास्तविकता यह है कि नेतृत्व कातात्पर्य इनमें से किसी एक व्यवहार से नहीं है बल्कि नेतृत्व व्यवहार का वहढंग होता है जिसमें एक व्यक्ति दूसरों के व्यवहार से प्रभावित न होकर अपनेव्यवहार से दूसरों को अधिक प्रभावित करता है। भले ही यह कार्य दबाव द्वाराकिया गया है अथवा व्यक्तिगत सम्बंधी गुणों को प्रदर्शित करके किया गया हो।

नेतृत्व की विशेषताएं

नेतृत्व की विशेषताएं इस प्रकार हैं-
  • 1. नेतृत्व वह विशेष व्यवहार है जिसमें प्रभुत्व, सुझाव तथा आग्रह का सम्मिश्रण होता है।
  • 2. नेतृत्व के लिए दो पक्ष नेता और अनुयायी का होना अनिवार्य है। नेता अनुयायियों के व्यवहार को अधिक सीमा तक प्रभावित करता है।
  • 3. नेतृत्व सम्बंधित प्रभाव दबाव युक्त नहीं होता। इसे साधारण तथास्वेच्छापूर्वक ग्रहण किया जाता है। दबाव केवल नेता के नैतिक प्रभाव काहोता है।
  • 4. नेतृत्व अनियोजित न होकर विचारपूर्वक अनुयायियों के व्यवहारों को निश्चित दिशा में मोड़ दिया जाता है।
  • 5 नेतृत्व के द्वारा व्यवहारों में किया जाने वाला परिवर्तन उत्तेजना से प्रभावित होता है।
  • 6. नेतृत्व की एक विशेष परिस्थिति (क्षेत्र) होती है। इस प्रकार एक हीव्यक्ति विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरह से नेतृत्व से प्रभावित हो सकताहै।

नेतृत्व का महत्त्व

प्रत्येक समूह के लिए नेतृत्व की आवश्यकता होती है। चाहे वह राजनैतिक होया सामाजिक, धार्मिक हो या औद्योगिक। कोई भी समूह बिना नेतृत्व केआस्तित्वहीन होता है। औद्योगिक क्षेत्र में मालिक या कर्मचारी ही नेता काचयन करते है। होना यह चाहिए कि मालिक और कर्मचारी दोनों मिलकर नेता काचुनाव करें। इस प्रकार की आदर्श चयन प्रणाली के द्वारा मालिक और कर्मचारीके बीच के छोटे-छोटे झगड़ों को रोका जा सकता है। इससे समस्याओं का समाधानभी जल्दी हो सकता है। मालिकों तथा प्रबंधकों द्वारा चुना व्यक्ति अधिकस्वामि-भक्ति रखता है और कर्मचारियों के हितों को उपेक्षित कर सकता है।इसके विपरीत कर्मचारियों द्वारा चुना व्यक्ति कर्मचारियों के प्रतिउत्तरदायी होता है। इस प्रकार नीति संघर्ष बढ़ने लगता है। इसलिए प्रभावशालीनेतृत्व के लिए आवश्यक है कि मालिक और कर्मचारी दोनों मिलकर योग्य, अनुभवीऔर व्यवहार कुशल व्यक्ति को नेता चुनें। नेतृत्व को तीन स्तर पर तीन वर्गोमें बांटा गया है-
() उच्चतम स्तर का प्रबंध (Top management),
() मध्यम स्तर का प्रबंध (Middle management),
() सम्मुख व्यक्ति का प्रबंध (Front line management)
प्रथम स्तर के प्रबंध में उच्च श्रेणी के बिग बॉस (Big Boss), मध्यमस्तर में केवल बॉस (Boss) तथा तीसरी श्रेणी में फोरमैन या सुपरवाइजर आतेहै। ये तीनों प्रकार के नेता भिन्न-भिन्न स्तरों पर कार्य करते है। इनकेउत्तरदायित्व व कर्त्तव्य भी भिन्न होते है। नेता को अपने पद पर बने रहनेके लिए आवश्यक होता है कि वह अपने समूह के प्रत्येक पक्ष पर संबंध बनाएरखने में समर्थ हो। इसलिए सुचारू कार्य के लिए यह आवश्यक होता है कि नेताअपने समूह के कर्मचारियों से हमेशा निकट के संबंध बनाए रखें, इससे नेता औरकर्मचारियों के बीच तनाव की स्थिति नहीं आएगी और न ही कोई अन्य समस्याएंउत्पादन को प्रभावित करेंगी।

नेतृत्व-प्रशिक्षण

यदि निरीक्षक प्रशिक्षित होता है तो कर्मचारियों से समायोजन स्थापितकरने में आसानी होती है। इसलिए नियुक्ति पद निरीक्षक को प्रशिक्षित कियाजाना चाहिए। प्रशिक्षित और अनुभवी निरीक्षक एक कुशल नेता ही नहीं वरन् वहकठिन परिस्थितियों में भी समस्या का समाधान किर सकता है। ऐसा कुशलजनतांत्रिक नेता कर्मचारियों के साथ समझौते या मन-मुटाव के समय अपनीप्रतिष्ठा को आगे नहीं आने देता। वह अपने संवेगों पर नियंत्रण करता है औरनिष्पक्ष व्यवहार करता है। सज्जन, ईमानदार व मेहनती कर्मचारियों को महत्वदेता है, उन कर्मचारियों को उत्पीड़न से बचाता है। कर्मचारियों को अधिक सेअधिक सुविधाएं प्रदान करता है तथा
  • उसे आवश्यकता से अधिक भावुक, संवेदनशील और संवेगात्मक नहीं होना चाहिए।
  • विचार-विमर्श में निपुणता तथा तर्कपूर्ण ढंग से कर्मचारियों से अपने विचारों को स्वीकार करा लेने की क्षमता हो।
  • कर्मचारी और मालिक के बीच तनाव की स्थिति पैदा होने पर उसे दोनों कीमध्यस्थता करते हुए समस्याओं के समाधान हेतु पर्याप्त योग्यता होनी चाहिए।
  • कर्मचारियों के विचारों में तालमेल बिठाने की योग्यता हो।
  • अधीनस्थ कर्मचारियों को यह महसूस कराने में सक्षम हो कि कर्मचारी उसे अपना ही एक भाग समझे।

उद्योग में सफल नेता के गुण

क्रेग एवं चार्ट्स ने एक सफल नेता ने निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक माना है-
1. समर्थता अर्थात् नेता में यह कौशल हो कि वह कर्मचारी से काम ले सके।
2. नेता में ऐसे गुण होने चाहिए जिससे कर्मचारी उसको सम्मान दे सके।
3. नेता का कर्मचारियों से पक्षपात रहित व्यवहार होना चाहिए।
4. नेता को प्रशिक्षित होना चाहिए, अनुभवी होना चाहिए जिससे वह कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित कर सके।
5. कर्मचारियों के साथ वादिता रखने वाला हो तथा किसी भी कर्मचारी से दूसरे कर्मचारी की बुराई न करें।
6. उसमें सरल आत्मविश्वास होना चाहिए, ताकि विषय प्रतिस्थितियों में भी वह अपने को कमजोर न समझे।
7. नेता में अपने क्रोध को नियंत्रित करने की क्षमता होनी चाहिए।
8. उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कर्मचारी उसके आदेशों का पालन कर रहे है या नहीं।
9. अथीनस्थ कर्मचारियों के उचित को भी मानने वाला तथा अपनी योग्यता और सुझावों द्वारा कर्मचारियों से कार्य लेने की क्षमता हो।
10. बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से कर्मचारियों को डांटने की क्षमता तथा समय आने पर उनकी प्रशंसा करने की योग्यता हो।
11. परिस्थितियों का सामना करने की योग्यता हो।
ब्लम (Blum) ने पांच सिद्धातों का वर्णन किया है। उनके अनुसार सफल नेता को निम्न पाँच सिद्धातों अन्तर्गत कार्य करना चाहिए-
1. कार्य का उचित मूल्याकंन
2. अधिकारियों का पर्याप्त मात्रा में प्रतिनिधित्व।
3. समस्त कर्मचारियों के साथ समान व उचित व्यवहार।
4. जब कभी कर्मचारी मिलना चाहे तो उसे अपना समय देना।
5. कर्मचारियों की समस्याओं का प्रबंधकों और मालिकों से विस्तार में विचार-विमर्श करना।

नेतृत्व के नियम

उद्योग में नेता की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने व्यवहारमें कुछ मूलभूत नियमों को भी शामिल करे। इससे कर्मचारी और नेता के बीचसन्तुलन बना रहता है। कुछ नियम इस प्रकार हैं-
समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनना- कर्मचारियों की अपनी समस्याएंहोती हैं जिन्हें नेता के सम्मुख रखते हैं। ऐसे में यदि नेता उत्तेजित होजाता है तो कर्मचारी अपनी बात को पूरा नहीं बता पाता है। इससे कर्मचारीहतोत्साहित हो जाता है। इसलिए कर्मचारी को बात करते समय बीच में भी नहींटोकना चाहिए या उसे रोकना नहीं चाहिए। इससे कर्मचारी के मन में उपेक्षा काभाव पैदा होता है। इसके विपरीत कर्मचारी की बातों को शांतिपूर्वक एवंधैर्यता से सुनना चाहिए। इससे कर्मचारी का विश्वास अपने नेता के प्रति बनारहता है। वे नेता की अवहेलना भी नहीं करते हैं।
सोच समझकर निर्णय लेना - नेता को चाहिए कि वह कोई भी निर्णय लेनेमें जल्दबाजी न करे। सोच-समझकर लिया हुआ निर्णय बाधक नहीं बनता है। इससेकई समस्याओं को उचित तरीके से सुलझाया जा सकता है।
कर्मचारियों को हतोत्साहित न करना - यदि नेता कर्मचारियों कोहतोत्साहित करेगा तो निश्चित ही उसका प्रभाव उद्योग में पड़ेगा।कर्मचारियों को समय-समय पर उत्साहित करना चाहिए ताकि कर्मचारी अपने कार्यके प्रति जागरूक रह सकें। यदि कर्मचारी अपनी समस्या लेकर आता है तो भी उसेडांट-फटकार नहीं देनी चाहिए। वरन् उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए।
नेता कम से कम संवेदनशील व संवेगशील हो - उद्योग में प्रायः नेताके सामने सम तथा विषम परिस्थिति आती रहती है। यदि नेता इन परिस्थितियोंमें ही अपने को समाहित कर ले तो वह उद्योग के लिए अच्छा नहीं होगा। नेता कीशिकायत अधिकतर संवेगपूर्ण होती है। ऐसे में यदि नेता स्वयं पर नियंत्रण नरखकर कर्मचारियों के साथ संवेगपूर्ण ढंग से व्यवहार करे तो समस्या और भीउलझ सकती है। इसके विपरीत यदि कर्मचारी पर आवश्यकता से अधिक संवेदना करताहै तो भी कर्मचारी इसका लाभ उठा सकते हैं। इसलिए नेता को विवेकपूर्णव्यवहार करना चाहिए।
नेता स्वयं वाद-विवाद से बचा रहे - प्रायः देखा जाता है किवाद-विवाद वैमनस्यता पैदा करता है। इसलिए नेता को कर्मचारियों के साथवाद-विवाद से बचना चाहिए। अधिक वाद-विवाद से कर्मचारी भी अपने को असुरक्षितमहसूस करने लगते हैं। कर्मचारियों को आज्ञाएं दी जा सकती हैं। उन्हेंथोपने का प्रयास नहीं करना चाहिए, इससे कर्मचारी एक अतिरिक्त बोझ समझनेलगता है।

कर्मचारियों की प्रशंसा करना- कर्मचारी उद्योग में अपनीमहत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। नेता को चाहिए कि वह समय आने पर उसकीप्रशंसा करे। प्रशंसा सबके सामने हो। इससे कर्मचारी प्रसन्नता का अनुभवकरता है। उसका मनोबल इससे बढ़ता है। वह अपने कार्य को मेहनत तथा लगन सेकरने लगता है। इसके विपरीत यदि कर्मचारी की बुराइयों को सबके सामने कहा जायतो कर्मचारी की स्थिति तनावपूर्ण होगी। उसका प्रभाव उद्योग पर पड़ेगा।इसलिए नेता कर्मचारी की बुराइयों को एकान्त में कहे इससे कर्मचारी का अहमसुरक्षित रहता है।

Tuesday, 10 May 2016

फोटो फीचर

फीचर का एक रूप फोटो फीचर भी है, जिसमें फीचर अपने असली रूप में प्रकट होता है. यहाँ शब्द कम होते हैं, उनकी जगह सुन्दर छायाचित्र होते हैं. लेकिन चित्रों को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त भी करना होता है. जहां हम फीचर से यह अपेक्षा करते हैं कि उसमें शब्दों के जरिये किसी व्यक्ति, स्थान या परिस्थिति का चित्रण किया गया हो, वहीं फोटो फीचर में चित्र पहले से ही उपलब्ध होते हैं. जो रिक्त स्थान रह जाते हैं, उन्हें ही शब्दों के जरिये भरना होता है. इसलिए यहाँ अत्यंत सुन्दर और प्रासंगिक शब्दों की जरूरत होती है. यहाँ हमारे पास शब्दों के लिए जगह बहुत ही कम होती है. कई बार कैप्शन या चित्र परिचय की तरह से विवरण प्रस्तुत करना होता है. इसलिए यहाँ भाषा-शैली की विशेष महत्ता है. सुन्दर चित्रों के बीच असुंदर शब्द नहीं चल सकते.

फोटो खींचते समय ध्यान रखें ये बातें:

(1) Clean The Lens :-
आपका स्‍मार्टफोन कभी हाथ में रहता है, तो कभी पॉकेट में. जिसके चलते यह काफी गंदा हो जाता है. हालांकि इसका सबसे ज्‍यादा असर कैमरे के लेंस पर पड़ता है. फोन को बार-बार हाथ में लेने पर लेंस में कुछ फिंगरप्रिंट आ जाते हैं, जोकि फोटो क्‍वॉलिटी को इफेक्‍ट करता है. अब अगर आप एक अच्‍छी और बेहतरीन फोटो खींचना चाहते हैं, तो लेंस को पहले साफ कर लें. लेंस गंदा रहने पर यह लाइट को ब्‍लॉक कर देता है. जिसके चलते फोटो ब्‍लर हो सकती है.

(2) Set The Focus :-
किसी फोटो को खींचने में फोकस का रोल सबसे अहम होता है. सब्‍जेक्‍ट की फोटो लेते समय, आपको यह सुनिश्‍िचत करना होगा कि कैमरा शॉर्प फोकस में रहे. इसके लिए स्‍क्रीन पर एक येलो स्‍क्‍वॉयर दिखाई देगा, जिसे टैप करते ही फोकस प्‍वॉइंट कंफर्म हो जाएगा. हालांकि अगर आपका सब्‍जेक्‍ट मूव कर रहा है, तो आपको शॉअ लेने से तुरंत पहले ही फोकस प्‍वॉइंट सेट करना होगा.

(3) Adjust Exposure Manually :-
एक बार फोकस प्‍वॉइंट सेट कर देने के बाद किसी सब्‍जेक्‍ट की फोटो आसानी से खींची जा सकती है. वहीं आप एक्‍सपोजर चाहते हैं, तो इसका ऑप्‍शन भी स्‍क्रीन पर उपलब्‍ध होता है. एक्‍सपोजर का सीधा मतलब यह होता है, कि इमेज कितनी ब्राइट और डॉर्क होगी. बताते चलें कि एक्‍सपोजर सेट करने से पहले फोकस प्‍वॉइंट क्‍लीयर करना कभी भी अच्‍छा नही माना जाता है. इससे फोटो खराब हो सकती है.

(4) Don’t Use The Zoom :-
आपने अक्‍सर देखा होगा कि, जब सब्‍जेक्‍ट दूर होता है तो उसकी फोटो लेने पर कुछ लोग स्‍क्रीन पर अपनी दो अंगुलियों से जूम करके फोटो खींच लेते हैं. यह तरीका गलत होता है. आपको बता दें कि यह डिजिटल जूम होता है न कि ऑप्‍टिकल जूम. इसके चलते जब इमेज क्रॉप की जाती है, तो उसकी इमेज क्‍वॉलिटी खराब हो जाती है. अब ऐसे में कभी भी दूर स्‍िथत सब्‍जेक्‍ट की फोटो लेना हो, तो उसके नजदीक चले जाएं और अगर नहीं जा सकते तो नॉर्मल मोड में ही फोटो खींच लें.

(5) Keep Your Camera Steady :-
फोटोग्राफी करने का यह नियम सबसे महत्‍वपूर्ण माना जाता है. किसी भी सब्‍जेक्‍ट की फोटो लेते समय आपका कैमरा स्‍िथर होना चाहिए. खासतौर पर लो लाइट या रात में फोटो खींचना हो, तो इस बात का ज्‍यादा ध्‍यान रखना होता है. कैमरे में अगर जरा भी मूवमेंट हुई तो फोटो ब्‍लर हो सकती है. ऐसे में फोटो खींचते समय हड़बड़ाहट न करें, शांत और स्‍िथर होकर सब्‍जेक्‍ट पर फोकस्‍ड रहें.

(6) Use The Rule Of Thirds :-
जितने भी प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स होते हैं, उनके लिए Rule Of Third सबसे महत्‍वपूर्ण होता है. इस नियम के मुताबिक, जिसमें दो horizontal लाइनें और दो vertical लाइनें होती हैं और यह फ्रेम को 9 बॉक्‍सेस में डिवाइड कर देती हैं. ऐसे में सब्‍जेक्‍ट को इन्‍हीं दोनों लाइनों के पास रखना होता है, जहां यह दोनों लाइनें मिलती हैं. यह एक प्रोफेशनली तरीका होता है, जिससे फोटो की खूबसूरती बढ़ जाती है.

(7) Use Leading Lines :-
अच्‍छी फोटोग्राफी के लिए लीडिंग लाइन बहुत ही यूजफुल टूल है. लीडिंग लाइन किसी भी फोटो के सब्‍जेक्‍ट को उभार देती है. इमेज में जो मेन सब्‍जेक्‍ट होता है, उसको हाईलाइट करने में लीडिंग लाइन काफी मददगार साबित होती हैं.

(8) Shoot From Different Perspectives :-
कई बार ऐसा होता है कि, एक प्रोफेशनल कैमरे से उतनी अच्‍छी फोटो नहीं आ सकती, जितनी कि स्‍मार्टफोन से. ऐसे में स्‍मार्टफोन से आप डिफरेंट एंगल से फोटो खींच सकते हैं. जोकि काफी खास होता है.

(9) Watch Out For Distracting Backgrounds :-
किसी फोटो की खूबसूरती तब बढ़ती है, जब उसके आस-पास की चीजें बेहतर ढ़ंग से व्‍यवस्‍िथत हों. अगर आपके सब्‍जेक्‍ट का बैकग्राउंड डिस्‍ट्रेक्‍िटव हो, तो इमेज क्‍वॉलिटी उतनी बेहतर नहीं बन पाएगी.

(10) Take Multiple Shots :-
किसी सब्‍जेक्‍ट की फोटो लेने पर उसके मल्‍टीपल शॉट लेने चाहिए, ताकि बाद में सेलेक्‍शन में आसानी रहे. अगर आप एक ही सब्‍जेक्‍ट के अलग-अलग तरीके से शॉट लेंगे, तो फोटो क्‍वॉलिटी बेहतर हो जाएगी.

Wednesday, 16 March 2016

टाइपिंग


कम्प्यूटर पर टाइपिंग दो प्रकार की होती है-
नॉन-यूनिकोड (ग़ैर-यूनिकोड)
यूनिकोड

नॉन-यूनिकोड
यह विधि कम्प्यूटर पर यूनिकोड प्रणाली के आने से पहले प्रयोग की जाती थी। इसमें पुराने समय के हिन्दी फॉण्ट प्रयोग किये जाते थे। इस टाइपिंग का उपयोग सिर्फ छपाई आदि के कामों में ही होता है। किसी वर्ड प्रोसैसर में हिन्दी का नॉन-यूनिको़ड फॉण्ट चुनकर टाइप किया जाता है तथा उसका प्रिण्ट लिया जा सकता है। किसी अन्य कम्प्यूटर पर वह टैक्स्ट दिखने के लिये वह विशेष फॉण्ट इंस्टाल होना चाहिये अन्यथा हिन्दी टैक्स्ट की जगह सिर्फ कचरा (जंक टेक्स्ट) दिखता है।

कमियाँ
इस तरीके से सिर्फ छपाई के लिये हिन्दी टाइप की जा सकती है तथा कम्प्यूटर पर अन्य जगहों पर हिन्दी का प्रयोग नहीं हो सकता।
हर नॉन-यूनिकोड फॉण्ट का कीबोर्ड लेआउट अलग-अलग होता है। माना आपको कृतिदेव का अभ्यास है तो आप सुशा में टाइप नहीं कर सकते।

यूनिकोड
यूनिकोड हिन्दी टाइपिंग की नई विधि है। यूनिकोड की विशेषता है कि यह फॉण्ट एवं कीबोर्ड लेआउटों पर निर्भर नहीं करती। आप किसी भी यूनिकोड फॉण्ट एवं किसी भी कीबोर्ड लेआउट का प्रयोग करके हिन्दी टाइप कर सकते हैं। यूनिकोड फॉण्ट में लिखी हिन्दी देखने के लिये उस फॉण्ट विशेष का कम्प्यूटर में होना जरुरी नहीं है। किसी भी यूनिकोड हिन्दी फॉण्ट के होने पर हिन्दी देखी जा सकती है। अधिकतर नये ऑपरेटिंग सिस्टमों में यूनिकोड हिन्दी फॉण्ट बना-बनाया आता है।

खूबियाँ
अंग्रेजी की तरह कम्प्यूटर पर सब जगह चलती है। आप इसे किसी वर्ड प्रोसैसर में, ईमेल में, वैबसाइट पर, मैसेन्जर आदि जगहों पर कहीं भी लिख सकते हैं।
फॉण्ट के झमेले से मुक्त है। किसी भी यूनिकोड श्रेणी के फॉण्ट से लिख एवं पढ़ सकते हैं।
कीबोर्ड लेआउट के झमेले से मुक्त है। उपयुक्त टूल का प्रयोग करके किसी भी कीबोर्ड लेआउट द्वारा हिन्दी लिखी जा सकती है।

कमियाँ
कुछ सॉफ्टवेयरों एवं वेब सेवाओं में हिन्दी का समर्थन न होने से हिन्दी कभी-कभी हिन्दी दिखती ही नहीं या फिर सही नहीं दिखाई देती है। 

हिन्दी के कीबोर्ड लेआउट
वैसे तो हिन्दी के लिये बहुत से कीबोर्ड लेआउट प्रचलित हैं परन्तु मुख्य तीन हैं:-
इनस्क्रिप्ट - हिन्दी का मानक कीबोर्ड लेआउट।
रेमिंगटन - मैकेनिकल टाइपराइटर का कीबोर्ड लेआउट।
फोनेटिक - ध्वन्यात्मक लिप्यन्तरण आधारित कीबोर्ड लेआउट। इसकी कोई मानक लिप्यंतरण स्कीम नहीं होती। अलग-अलग टूल में अलग-अलग स्कीम प्रयोग होती है।

हिन्दी टाइपिंग विधियाँ

टच टाइपिंग
टच टाइपिंग से आशय होता है बिना कीबोर्ड को देखे केवल छूकर टाइप करना। हिन्दी में मूल रुप से इनस्क्रिप्ट एवं रेमिंगटन टच टाइपिंग प्रणालियाँ हैं। फोनेटिक मूल रुप से टच टाइपिंग प्रणाली नहीं है लेकिन यदि अंग्रेजी की क्वर्टी टच टाइपिंग का अभ्यास हो तो फोनेटिक को भी बिना देखे टाइप किया जा सकता है।

साइट टाइपिंग
साइट टाइपिंग से आशय है कि कुञ्जियों को देख-देखकर टाइप करना। हिन्दी में साइट टाइपिंग के लिये देवनागरी वर्ण अंकित इनस्क्रिप्ट लेआउट के कीबोर्ड उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त इनस्क्रिप्ट लेआउट के स्टीकर भी मिलते हैं जिन्हें मौजूदा कीबोर्ड पर चिपकाया जा सकता है। इनस्क्रिप्ट लेआउट में वर्ण विशेष क्रम में होते हैं इसलिये ये टच और साइट दोनों प्रकार की टाइपिंग के लिये उपयुक्त होता है।

दूसरी विधि फोनेटिक में यद्दपि देख-देखकर ही टाइप किया जाता है लेकिन वह सही रुप में साइट टाइपिंग भी नहीं है क्योंकि देवनागरी के बजाय अंग्रेजी के वर्णों को टाइप करके हिन्दी लिखी जाती है। रेमिंगटन साइट टाइपिंग के लिये कतई उपयुक्त नहीं क्योंकि इसका लेआउट काफी कठिन होता है और वर्णों को ढूंढना बहुत मुश्किल होता है।

कंप्यूटर ग्राफिक्स


कंप्यूटर ग्राफिक्स कंप्यूटर के सहयोग से सृजित ग्राफिक्स यानि रेखाचित्र होते हैं। इनमें अधिकांशतः चित्र डाटा का कंप्यूटर के द्वारा प्रदर्शन और परिवर्तन किया गया होता है। कंप्यूटर ग्राफ़िक्स के विकास से कंप्यूटरों के कई प्रकार के डाटा को समझने, भाषांतर करने और प्रयोग करने के अनुभव बढ़े हैं। कंप्यूटर ग्राफ़िक्स के क्षेत्र में विकास के साथ एनिमेशन, मूवीज़ और वीडियो खेलों में बहुत बड़ी प्रगति हुई है।

आज हर घर में अपनी जगह बना चुका कंप्यूटर शायद इतना उपयोगी और लोकप्रिय नहीं हो पाता यदि कंप्यूटर ग्राफिक्स की दुनिया में इतने सारे नए प्रयोग देखने को नहीं मिले होते। यह टॉपिक कंप्यूटर कोर्सेज का भी एक अहम हिस्सा होता है और करियर के लिहाज़ से भी यह हॉट च्वॉइस रहता है।

एक से बढ़ कर एक कंप्यूटर गेम्स के रोमांच का मज़ा लेने से लेकर कंप्यूटर पर एनिमेटेड मूवीज़ का लुत्फ उठाना इतना मज़ेदार और आसान नहीं होता यदि ग्राफिक्स में दिन प्रतिदिन नई हलचलें नहीं मचती। आजकल सभी सॉफ्टवेयर जीयूआई आधारित होते हैं जिस कारण इन्हें उपयोग करना काफी आसान हो जाता है। इंटरफेस के रूप में यहां मेन्यू, आइकॉन आदि का उपयोग किया जाता है, जो काफी सुविधाजनक और फास्ट होता है। वास्तव में यह सब ग्राफिक्स का ही तो खेल होता है।

कंप्यूटर के द्वारा बनाए जाने वाले ग्राफिक्स कंप्यूटर ग्राफिक्स कहलाते हैं। इसे इस प्रकार से भी कहा जा सकता है कि कंप्यूटर द्वारा इमेज डाटा को जब रिप्रजेंट और मैनिपुलेट किया जाए तो उसे ग्राफिक्स कहते हैं। एनिमेशन, मूवीज़, गेम्स इंडस्ट्रीज़ आदि में इसका खूब प्रभाव पड़ा है। कंप्यूटर द्वारा जब डाटा का पिक्टोरियल रिप्रेजंटेशन और मैनिपुलेशन किया जाता है तो उसे हम ग्राफिक्स कह सकते हैं। कंप्यूटर ग्राफिक्स कंप्यूटर साइंस का एक फील्ड है, जिसके अंतर्गत हम विजुअल कंटेंट को मेनिपुलेट और डिजिटली सिनथेसाइजिंग करने के विधि के बारे में पढ़ते हैं।
एनिमेशन भी कंप्यूटर ग्राफिक्स के अंतर्गत ही आता है। एनिमेशन वास्तव में कंप्यूटर की सहायता से मूविंग इमेज (चलती-फिरती पिक्चर) बनाने की कला है। आपको राज़ की बात बताते हैं कि जब भी आप ऐसे एनिमेटिड इमेज देखें तो यह मत सोचिए कि वास्तव में यह चलती फिरती इमेज है। दरअसल होता यह है कि जब स्क्रीन पर कोई इमेज दिखती है तो बहुत जल्द उसी तरह की दूसरी इमेज पहले वाले इमेज को रिप्लेस करती रहती है। यह प्रक्रिया इतनी तेज़ी से होती है कि हम समझ बैठते हैं कि इमेज मूवमेंट कर रही है, जबकि वास्तव में एक इमेज दूसरे इमेज को इसके थोड़े आगे-आगे रिप्लेस करती रहती है।

एप्लीकेशन एरिया : एजुकेशन, साइमुलेशन, ग्राफ रिप्रेजंटेशन, इंजीनियरिंग, मेडिसिन, इंडस्ट्री, आर्ट, एंटरटेनमेंट आदि सभी क्षेत्रों में कंप्यूटर ग्राफिक्स का बोलबाला है। कंप्यूटर-एडेड डिज़ाइन द्वारा इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर में ग्राफिक्स का खुब इस्तेमाल किया जाता है। फाइन आर्ट, कमर्शियल आर्ट एप्लीकेशंस में भी इसका उपयोग किया जाता है। टेलीविज़न शोज़, म्यूज़िक वीडियो, मोशन पिक्चर्स आदि में भी ग्राफिक्स का ही कमला रहता है।

ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर : ग्राफिक्स के लिए उपलब्ध सॉफ्टवेयर को आमतौर पर दो भागों में रखा जाता है-जनरल प्रोग्रामिंग पैकेज और स्पेशल परपज एप्लीकेशंस पैकेज। जनरल प्रोग्रामिंग पैकेज सॉफ्टवेयर में कई ग्राफिक्स फंक्शंस होते हैं, जो हाई-लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेजों में उपयोग किए जाते हैं। इन फंक्शंस द्वारा पिक्चर कंपोनेंट्स डिज़ाइन किए जाते हैं। स्पेशल एप्लीकेशंस पैकेज आमतौर पर उनके लिए हैं, जो कंप्यूटर एक्सपर्ट तो नहीं होते, फिर भी डिस्प्ले जेनरेट कर सकते हैं। 3D Max. Aladdom 4 D,Cinema 4D, Maya, Modo आदि ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर्स हैं।

क्या है ग्राफिक डिजाइनिंग
ग्राफिक डिजाइनिंग में मूल रुप सें विजुअल सें संबंधित समस्याओं को हल करा जाता है। इसमें टेक्स्ट और ग्राफिकल एलिमेंट का प्रयोग किया जाता है। इसका मुख्य कार्य पेज एवं अन्य पोग्राम को आकर्षक और सुंदर बनाने का होता है।
सही माएनों में ग्राफिक डिजाइन वह आर्ट है जिसमें टेक्स्ट और ग्राफिक के द्वारा किसी संदेश को लोगो तक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाता है। ये संदेश ग्राफिक्स, लोगो, ब्रोशर, न्यूज लेटर,पोस्टर या फिर किसी भी रुप में हो सकते हैं।

संभावनाएँ
करियर विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में स्‍कि‍ल्‍ड लोगों की बेहद माँग है। विज्ञापन एजेंसी, पब्लिक रिलेशन, न्यूज पेपर, मैगजीन, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आदि क्षेत्रों इस कोर्स को करने के बाद रोजगार के अच्छे अवसर प्राप्त हो जाते हैं। यदि आपके अंदर योग्यता है तो रोजगार जरुर मिलेगा। देश मे बैठ कर भी लोग विदेशी कम्पनियों के लिए काम करके अच्छे पैसे कमा सकते हैं। ये लोग इटंरनेट के जरिये अपने काम को अजांम देते हैं।
न्यूजपेपर व टीवी चैनलों की बढ़ती संख्या ने भी इस क्षेत्र में आने वाले युवाओं के लिए रोजगार के कई दरवाजे खोल दिए हैं। स्टेश्नरी प्रिटिंग, इंटीरियर आर्किटेकचर, प्रोडक्ट पैकेज डिजाइनिंग, एनिमेशन आदि में रोजगार के अवसर मौजूद हैं। इस क्षेत्र में शुरुआती दौर से ही अच्छा वेतन मिलने लगता है। एक बार अनुभव हो जाने पर अच्छा डिजाइनर एक से डेढ़ लाख रुपय तक कमा लेता है।
कम्प्यूटर, मोबाइल एवं अन्य कम्प्यटिंग डिवाइसों पर हिन्दी में टाइप करने के लिये विविध तरीके प्रयोग किये जाते हैं। इनमें विविध प्रकार की टाइपिंग, विविध प्रकार के कीबोर्ड एवं सॉफ्टवेयर शामिल हैं।