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Monday, 8 February 2016

कंप्यूटर ग्राफिक्स

कंप्यूटर ग्राफिक्स

कंप्यूटर ग्राफिक्स कंप्यूटर के सहयोग से सृजित ग्राफिक्स यानि रेखाचित्र होते हैं। इनमें अधिकांशतः चित्र डाटा का कंप्यूटर के द्वारा प्रदर्शन और परिवर्तन किया गया होता है। कंप्यूटर ग्राफ़िक्स के विकास से कंप्यूटरों के कई प्रकार के डाटा को समझने, भाषांतर करने और प्रयोग करने के अनुभव बढ़े हैं। कंप्यूटर ग्राफ़िक्स के क्षेत्र में विकास के साथ एनिमेशन, मूवीज़ और वीडियो खेलों में बहुत बड़ी प्रगति हुई है।


अडोबी पेजमेकर
पेजमेकर अडोबी द्वारा विकसित एक पेज लेआउट सॉफ्टवेयर है। यह डीटीपी के कार्यों में काफी प्रयुक्त होता है। इसका नवीनतम संस्करण अडोबी इनडिजाइन के नाम से है। अभी भी भारत में पेजमेकर का छोटे-मोटे व्यवसायों एवं दुकानों में काफी कार्य होता है।
पब्लिशिंग के क्षेञ में पेजमेकर सदैव अग्रणी रहा है, पेजमेकर को एल्‍डस कम्‍पनी ने बनाया और बाद में इसे एडोब कॉरपोरेश ने ग्रहण किया, तब से इसकी साख और बढ गयी, वैसे तो पेजमेकर के बहुत से संस्‍करण मार्केट में आये लेकिन पेजमेकर के सॉतवे संस्‍करण या वर्जन में कुछ ऐसे तत्‍व जोडे गये कि इसमें पब्लिशिंग का कार्य बहुत तेजी से होने लगा, इस सॉफ्टवेयर में हम विजिटिंग कार्ड, बायोडाटा, किताबें, मैगजीन, अखबार लैटरपैड, पैम्‍पलेट आदि डिजायन कर सकते हैं 

पेजमेकर की एक मुख्य कमी है कि यह इण्डिक यूनिकोड का समर्थन नहीं करता, जिस कारण इसमें यूनिकोड हिन्दी (अथवा कोई अन्य इण्डिक भाषा) टाइप नहीं की जा सकती। अत: छपाई सम्बंधी कार्यों के लियेनॉनृ-यूनिकोड हिन्दी (इण्डिक) फॉण्टों का सहारा लेना पड़ता है।
अधिकतर नॉन-यूनिकोड फॉण्ट रेमिंगटन लेआउट का प्रयोग करते हैं, जिन्हें रेमिंगटन का अभ्यास न हो उनको पहले किसी अन्य औजार में टैक्स्ट टाइप करके फिर उसे कॉपी कर पेजमेकर में पेस्ट करना पड़ता है। फोनेटिक द्वारा नॉन-यूनिकोड फॉण्ट में टाइप करने के लिये हिन्दीपैड, तथा बरह डायरॅक्ट नामक तथा इनस्क्रिप्ट द्वारा टाइप करने के लिये माध्यम नामक औजार का प्रयोग किया जा सकता है।
पेजमेकर के नये संस्करण इनडिजाइन में हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं का समर्थन सक्षम करने हेतु इण्डिकप्लस नामक एक प्लगइन उपलब्ध है।

क्वॉर्क एक्सप्रेस
यह एक कंप्यूटर एप्लीकेशन है जो कि पेज लेआउट के लिए उपयोग किया जाता है। यह मैक और विंडोज पर रन करता है। इसे सबसे पहले 1987 में लॉन्च किया गया था।

स्प्रेडशीट

स्प्रेडशीट

स्प्रेडशीट आपको बज़ट और व्यवसायिक योजना बनाने में मदद करती है। ऐसी रिपोर्ट जिसमें गणित शामिल हो, स्प्रेडशीट काम आती है।
स्प्रेडशीट एक कंप्यूटर अनुप्रयोग है जो कार्यपत्रक का हिसाब करने वाले एक कागज़ की नकल है। यह कई कक्षों को प्रदर्शित करता है जो एकसाथ मिलकर एक जाल बनाते हैं जिनमें पंक्तियां और स्तंभ शामिल होते हैं, प्रत्येक कक्ष में अल्फ़ान्यूमेरिक पाठ, संख्यात्मक मूल्य, या सूत्र शामिल होते हैं। एक सूत्र यह परिभाषित करता है कि उस कक्ष की अंतर्वस्तु की किसी अन्य कक्ष (या कक्षों के संयोजन) की अंतर्वस्तु से, जब भी कोई कक्ष अद्यतन किया जाता है तो कैसे गणना की जा सकती है। स्प्रेडशीट का इस्तेमाल वित्तीय जानकारी के लिए अक्सर किया जाता है इसका कारण है एक एकल कक्ष में बदले जाने के बाद भी संपूर्ण पत्रक की स्वतः ही पुन: गणना कर लेने की क्षमता.

"स्प्रेडशीट" शब्द "स्प्रेड" से आया है जो एक अखबार या पत्रिका की वस्तु (टेक्स्ट/या ग्राफिक्स) के भाव से लिया गया है जिसमें दो पृष्ठ आमने-सामने शामिल होते हैं, जो मध्य के मोड़ से दोनो ओर फैली हुई होती है और दोनों ही पृष्ठों को एक बड़ा पृष्ठ माना जाता है। मिश्रित शब्द "स्प्रेड-शीट" उस प्रारूप के अर्थ के रूप में सामने आया है जो बहीखाता खातों के प्रस्तुत करने में उपयोगी होता है - जिसमें ऊपरी भाग के आर पार व्यय की श्रेणियों के लिए कॉलम बने होते हैं, बाएं मार्जिन के नीचे चालानों को सूचीबद्ध किया जाता है और प्रत्येक भुगतान की राशि को उन कक्षों में डाला जाता है जहां इसके स्तंभ और पंक्तियां प्रतिच्छेद करती हैं - जो पारंपरिक रूप से जिल्दबंद खाते के दो आमने-सामने के पृष्ठों के आर-पार "फैली" हुई होती है (लेखांकन रिकॉर्ड रखने के लिए पुस्तक) या वृहदाकार कागज के शीटों पर जो धारियों द्वारा पंक्तियों और स्तंभों में ऊसी प्रारूप में और सामान्य कागजों से लगभग दोगुनी व्यापक होती है।

वर्तमान स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर्स

बंद स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर्स

वर्ड प्रोसेसिंग

वर्ड प्रोसेसिंग
इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके आप लिख सकते हैं, दस्तावेज में कांट छांट कर सकते हैं, रिपोर्ट और अन्य डॉक्यूमेंट तैयार कर सकते हैं।

Word processing is the phrase used to describe using a computerto create, edit, and print documents. Of all computer applications, word processing is the most common. To perform word processing, you need a computer, a special program called a word processor, and a printer. A word processor enables you to create a document,store it electronically on a disk, display it on a screen, modify it by entering commands and characters from the keyboard, and print it on a printer.

Word processing software is used to manipulate text and apply a basic design to your pages. Word processing software is used to manipulate a text document, such as a resume or a report. You typically enter text by typing and the software provides tools for copying, deleting and various types of formatting. Some of the functions of word processing software include:

Creating, editing, saving and printing documents.
Copying, pasting, moving and deleting text within a document.
Formatting text, such as font type, bolding, underlining or italicizing.
Creating and editing tables.
Inserting elements from other software, such as illustrations or photographs.
Correcting spelling and grammar.

Word processing includes a number of tools to format your pages. For example, you can organize your text into columns, add page numbers, insert illustrations, etc. However, word processing does not give you complete control over the look and feel of your document. When design becomes important, you may need to use desktop publishing software to give you more control over the layout of your pages.

सॉफ्टवेयर

'सॉफ्टवेयरउन प्रोग्रामों को कहा जाता है, जिनको हम हार्डवेयर पर चलाते हैं। किसी भी कम्प्यूटर को चलाने के लिये जो सबसे आवश्यक सॉफ्टवेयर है वह है ऑपरेटिंग सिस्टम. ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना आप कम्प्यूटर में काम नहीं कर सकते.

ऑपरेटिंग सिस्टम: ऑपरेटिंग सिस्टम व्यवस्थित रूप से जमे हुए साफ्टवेयर का समूह है जो कि आंकडो एवं निर्देश के संचरण को नियंत्रित करता है। आपरेटिंग सिस्टम हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर के बीच सेतु का कार्य करता है। कम्प्यूटर का अपने आप में कोई अस्तित्व नही है। यह केवल हार्डवेयर जैसे की-बोर्ड, मॉनिटर, सी.पी.यू इत्यादि का समूह है। आपरेटिंग सिस्टम समस्त हार्डवेयर के बीच सम्बंध स्थापित करता है। आपरेटिंग सिस्टम के कारण ही प्रयोगकर्ता को कम्प्यूटर के विभिन्न भागों की जानकारी रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। साथ ही प्रयोगकर्ता अपने सभी कार्य तनाव रहित होकर कर सकता है। यह सिस्टम के संसाधनों को बांटता एवं व्यवस्थित करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम के कई अन्य उपयोगी विभाग होते है जिनके कई काम केन्द्रिय प्रोसेसर द्वारा किए जाते है। उदाहरण के लिए आप प्रिटिंग का कोई काम करें तो केन्द्रिय प्रोसेसर आवश्यक आदेश देकर वह कार्य आपरेटिंग सिस्टम पर छोड देता है और वह स्वयं अगला कार्य करने लगता है। इसके अतिरिक्त फाइल को पुनः नाम देना, डायरेक्टरी की विषय सूची बदलना, डायरेक्टरी बदलना आदि कार्य आपरेटिंग सिस्टम के द्वारा किए जाते है।

आज जो सबसे प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम हैं वह माइक्रोसॉफ्ट कंपनी द्वारा बनाये गये हैं। इनमें डॉस (DOS), विंडोज-98, विंडोज-एक्स पी, विंडोज-विस्टा प्रमुख हैं। लेकिन इन सभी को कम्प्यूटर के साथ आपको खरीदना पड़ता है। यदि आप मुफ्त का ऑपरेटिंग सिस्टम प्रयोग करना चाहते हैं तो उसके लिये लिनक्स के कई ऑपरेटिंग सिस्टम हैं जो पूरी तरह मुफ्त हैं। इनमे से कई विंडोज से कई मायने में बेहतर भी हैं लेकिन इनको सीखने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। चुंकि अभी विंडोज ही बहु-प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम है इसलिये हम उसी से संबंधित उदाहरणों का प्रयोग इस लेख में करेंगे.


एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर: एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर आपके रोज मर्रा की जरूरत को पूरा करते हैं। जैसे यदि आप यदि कुछ लिखना चाहें तो उसके लिये विंडोज में नोटपैड व वर्डपैड है। इसके अलावा आप ओपन ऑफिस का प्रयोग कर सकते हैं जो मुफ्त है या माइक्रोसोफ़्ट ऑफिस खरीद सकते हैं जिसमें से आप माइक्रोसॉफ्ट वर्ड का उपयोग लिखने के लिये कर सकते हैं। इसके अलावा आप डाटा के गणितीय, सांख्यिकीय उपयोग के लिये माइक्रोसॉफ्ट एक्सल और प्रजेंटेशन बनाने के लिये पावर पॉइंन्ट का उपयोग कर सकते हैं। किसी भी प्रकार की ड्राइग के लिये विंडोज में पेन्ट नाम का सॉफ्टवेयर होता है यदि आपको एडवांस ड्राइंग करनी है तो आप गिम्प (GIMP) का प्रयोग कर सकते हैं जो कि मुफ्त है या फिर अडोब कंपनी का फोटोशॉप सॉफ्टवेयर खरीद सकते हैं।

Wednesday, 3 February 2016

मेमोरी

प्राइमरी मेमोरी: यह वह युक्तियाँ होती हैं जिसमें डेटा व प्रोग्राम्स तत्काल प्राप्त एवं संग्रह किए जाते हैं।
रीड-राइट मेमोरी, रैम (RAM): इस मेमोरी में प्रयोगकर्ता अपने प्रोग्राम को कुछ देर के लिए स्टोर कर सकते हैं। साधारण भाषा में इस मेमोरी को RAM कहते हैं। यही कम्प्यूटर की बेसिक मेमोरी भी कहलाती है। यह दो प्रकार की होती है:

डायनेमिक रैम (DRAM): डायनेमिक का अर्थ है गतिशील। इस RAM पर यदि 10 आंकड़े संचित कर दिए जाएं और फिर उनमें से बीच के दो आंकड़े मिटा दिए जाएं, तो उसके बाद वाले बचे सभी आंकड़े बीच के रिक्त स्थान में स्वतः चले जाते हैं और बीच के रिक्त स्थान का उपयोग हो जाता है।
स्टैटिक रैम (SRAM): स्टैटिक रैम में संचित किए गए आंकड़े स्थित रहते हैं। इस RAM में बीच के दो आंकड़े मिटा दिए जाएं तो इस खाली स्थान पर आगे वाले आंकड़े खिसक कर नहीं आएंगे। फलस्वरूप यह स्थान तब तक प्रयोग नहीं किया जा सकता जब तक कि पूरी मेमोरी को “वाश” करके नए सिरे से काम शुरू न किया जाए।

रीड ओनली मेमोरी, ROM (Read Only Memory): ROM उसे कहते हैं, जिसमें लिखे हुए प्रोग्राम के आउटपुट को केवल पढ़ा जा सकता है, परन्तु उसमें अपना प्रोग्राम संचित नहीं किया जा सकता। ROM में अक्सर कम्प्यूटर निर्माताओं द्वारा प्रोग्राम संचित करके कम्प्यूटर में स्थाई कर दिए जाते हैं, जो समयानुसार कार्य करते रहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर ऑपरेटर को निर्देश देते रहते हैं। बेसिक इनपुट आउटपुट सिस्टम ( BIOS) नाम का एक प्रोग्राम ROM का उदाहरण है, जो कम्प्यूटर के ऑन होने पर उसकी सभी इनपुट आउटपुट युक्तियों की जांच करने एवं नियंत्रित करने का काम करता है।


सेकेंडरी मेमोरी: यह एक स्थाई संग्रहण युक्ति है। इसमे संग्रहित डेटा तथा प्रोग्राम्स कम्प्यूटर के ऑफ होने के बाद भी इसमे स्थित रहते है।

मैगनेटिक टेप: डाटा को स्थाई तौर पर संग्रहित कर सकने वाले उपकरणों में मैगनेटिक टेप का नाम प्रमुखता से आता है। इसमें ½ इन्च चौड़ाई वाली प्लास्ट्रिक की बिना जोड़ वाली लम्बी पटी होती है। जिस पर फैरोमेग्नेटिक पदार्थ की पर्त चढ़ाई जाती है। इस पट्टी को ही हम टेप कहते हैं। टेप विभिन्न लम्बाइयों में उपलब्ध होता है। प्रायः 400, 800, 1200 या 2400 फीट लम्बाई वाले मैगनेटिक टेप उपलब्ध होते हैं।टेप पर डाटा मेगनेटाइज्ड या नॉन मैगनेटाईज्ड बिन्दुओं के रूप में लिखा जाता है। एक अक्षर के लिए 7 बिट या 9 बिट कोड प्रयोग में लाया जाता हैमैगनेटाइज्ड एवं नॉन मैगनेटाइज्ड बिन्दुओं की कतारें टेप की लम्बाई के समानान्तर बन जाती है। इन्हें हम Tracks कहते हैं।

मैगनेटिक डिस्क: मैगनेटिक डिस्क की तुलना रिकार्ड प्लोयर के लॉग प्लेविंग L.P. रिकार्ड से कर सकते हैं। ऐसे कई रिकार्डस या डिस्क को एक के ऊपर एक कुछ अन्तर से लगा दिया जाय तो वे मैगनेटिक डिस्क के समान दिखेगें। सभी डिस्क एक के ऊपर एक समान्तर लगी होती है। सभी डिस्कों के बने इस माध्यम को डिस्क पैक कहते हैं। डिस्क पैक में 11 अथवा 20 ऐसी सतहें होती है। प्रायः सबसे ऊपरी तथा सबसे निचली सतह पर डाटा नहीं लिखा जाता है। इस ड्राइव में रीड व राइट हेड लगे होते हैं। जो डाटा को लिखने और पढ़ने का काम करते हैं। ये डाटा को Tracks के रूप में डिस्क पैक पर लिखते हैं।

फ्लॉपी डिस्क: यह एक छोटी लचीली डिस्क होती है जिसकी डाटा संग्रह करने की क्षमता बहुत अधिक नहीं होती। कीमत की लिहाज से यह बहुत सस्ती होती है। एक लचीली प्लास्टिक शीट के ऊपर मैगनेटिक ऑक्साइड कोटिंग करके इसे तैयार किया जाता है। इसके एक रीड/राइट हेड होता है जो फ्लॉपी की सतह से स्पर्श करके डाटा लिखता व पढ़ता है। ये  १.४४ और २.८८ MB कि क्षमता में उपलब्ध होती है. फ्लापी डिस्क कि तरह ही एक ZIP डिस्क होता है जिसकी क्षमता १०० MB होती है.

पेन ड्राइव: ये एक एक्सटर्नल स्टोरेज होता है जिसे हम सीधे USB पोर्ट पर लगा सकते हैं. ये इस्तेमाल करने में बहुत आसन होता है और आसानी से उपलब्ध भी है. इसकी डाटा संग्रह करने कि क्षमता भी ज्यादा होती है. ये सामान्यतः १, २, ४, ८, १६ GB या उससे भी अधिक क्षमता में उपलब्ध है. यही कारण है कि आजकल इसका अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा है.

CD/DVD ड्राइव: ये भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले स्टोरेज डिवाइस में से है. ये सस्ती होती है और इसकी संग्रहण क्षमता काफी अधिक होती है. आम  तौर पर एक CD की संग्रहण क्षमता ७००-८०० MB और एक DVD की अधिकतम क्षमता १७ GB होती है.

हार्ड डिस्क ड्राइव: ये किसी भी कम्पुटर की सबसे मुख्य स्टोरेज डिवाइस होती है. इसकी संग्रहण क्षमता बहुत अधिक होती है इसलिए ये कंप्यूटर के मुख्य संग्रहनक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. आजकल हार्ड डिस्क ड्राइव ४०, ८०, १६०, ३२०, ५०० GB या उससे अधिक क्षमता में उपलब्ध है.

इनपुट और आउटपुट डिवाइस

इनपुट डिवाइस: जिन युक्तियों का प्रयोग डेटा और निर्देशों को कम्प्यूटर में प्रविष्ट करने के लिए किया जाता है, वे सभी युक्तियां आगम अथवा इनपुट युक्तियां कहलाती हैं। यह भी कहा जा सकता है कि मानवीय भाषा में प्रविष्ट किए जा रहे डेटा अथवा प्रोग्राम को कम्प्यूटर के समझने योग्य रूप में परिवतर्तित करने के लिए प्रयोग की जाने वाली युक्तियों को इनपुट युक्तियां कहा जाता है। ये युक्तियां अक्षरों, अंकों तथा अन्य विशिष्ट चिन्हों को बायनरी डिजिट अर्थात 0 तथा 1 में परिवर्तित करके सी.पी.यू. के समझने योग्य बनाती हैं। इनपुट के लिए सबसे अधिक प्रयुक्त की जाने वाली युक्ति की-बोर्ड और माउस है।  इन्हें अलग अलग श्रेणियों में बात जा सकता है. कुछ और इनपुट डिवाइस हैं:


की-बोर्ड
टैकर बॉल
लाइट पेन
जायस्टिक
हैण्ड-हैल्ड टर्मिनल
बार-कोड रिकॉगनेशन
OMR, OCR एवं MICR
स्कैनर
माइक

ऑन लाइन इनपुट डिवाइसेज: यह वह युक्तियाँ हैं जिससे हम सिस्टम में सीधे इनपुट प्रदान कर सकते हैं। यह सिस्टम से जुड़े रहते हैं। उदाहरण - माऊस ,की-बोर्ड ,लाइट पेन ,जायस्टिक आदि।
ऑफ लाइन इनपुट डिवाइसेज: यह वह युक्तियाँ हैं जिसमे सिस्टम में जोड़ने से पहले हम इनपुट तैयार कर लेते हैं और फिर आवश्यकता अनुसार उनसे इनपुट पढ़ने के लिए उन्हें हम सिस्टम से जोड़ लेते हैं। उदाहरण - की से पंच कार्ड, की से टेप सिस्टम आदि।

कुछ डिवाइस ऐसे होते हैं जो इनपुट में भी आते हैं और आउटपुट में भी
आउटपुट डिवाइस: निर्गम उपकरण से तात्पर्य ऐसे उपकरणों से होता है जो कि किसी संगणना के परिणामों को निर्गम तक पहुंचाते हैं। ये परिणाम दृश्य प्रदर्शन इकाई द्वारा दिखलाये जा सकते हैं, प्रिन्टर द्वारा मुद्रित कराये जा सकते हैं, चुम्बकीय माध्यमों पर संग्रहित किये जा सकते हैं अथवा अन्य किसी विधि द्वारा यह निर्गम प्राप्त किये जा सकते हैं। एक कम्प्यूटर प्रणाली के विभिन्न अवयवों में कई उपकरण जो कि चुम्बकीय सिद्धान्तों पर कार्य करते हैं. कम्प्यूटर में आंकड़ों के आगम एवं निर्गम दोनों ही उपयोगों हेतु प्रयोग किये जाते हैं निर्गम युक्तियाँ दो प्रकार की होती है:
हार्ड कॉपी युक्तियाँ: यह वह युक्तियाँ हैं जिससे हम कागज पर आउटपुट प्राप्त कर सकते हैं । जैसे प्रिन्टर, प्लॉटर
सॉफ्ट कॉपी युक्तियाँ: यह वह युक्तियाँ हैं जिससे हम सिस्टम पर अस्थाई रूप में आउटपुट प्राप्त कर सकते हैं जैसे मॉनिटर, L.C.D इत्यादि.

कम्प्यूटर हार्डवेयर

साधारण रूप से कम्प्यूटर के वे सभी प्रभाग जिन्हें देखा तथा छुआ जा सकता है, कम्प्यूटर हार्डवेयर कहलाते हैं। इनमें मुख्य रूप से कम्प्यूटर के यांत्रिक, वैद्युत तथा इलैक्ट्रोनिक प्रभाग आते हैं। कम्प्यूटर के अन्दर तथा बाहर के सभी प्रभाग, कम्प्यूटर की इनपुट तथा आउटपुट युक्तियां आदि सभी कम्प्यूटर हार्डवेयर ही हैं। कम्प्यूटर की वे युक्तियां, जो कि कम्प्यूटर को चलाए जाने के लिए आवश्यक होती हैं, स्टेण्डर्ड युक्तियां कहलाती हैं. जैसे- की-बोर्ड, फ्लॉपी ड्राइव, हार्डडिस्क आदि। इन युक्तियों के अतिरिक्त वे युक्तियां, जिनको कम्प्यूटर से जोड़ा जाता है, पेरीफेरल युक्तियां कहलाती है। स्टैण्डर्ड तथा पेरीफेरल युक्तियों को मिलाकर ही कम्प्यूटर हार्डवेयर तैयार होता है।

इनपुट और आउटपुट उपकरण कम्प्यूटर और मानव के मध्य सम्पर्क की सुविधा प्रदान करते हैं। इनपुट डिवाइसेज मानवीय भाषा में दिये गये डाटा और प्रोग्रामों को कम्प्यूटर के समझने योग्य रूप में परिवर्तित करती हैं। दूसरी ओर आउटपुट डिवाइसेज 0 और 1 बिट के संकेतों को अनुवादित कर मानव के समझने योग्य भाषा में परिवर्तित कर प्रस्तुत करते हैं। ये डिवाइसेज को स्क्रीन पर या पिंटर द्वारा कागज पर छापकर प्रस्तुत करते हैं। इनपुट या आउटपुट डिवाइसेज प्रायः कम्प्यूटर के सीधे नियंत्रण में रहते हैं। ऑपरेटर इंटरफेस कम्प्यूटर से ऑपरेटर का (कार्य़ करते समय) सम्पर्क इंटरफेस कहलाता है।

ऑपरेटर इंटरफेस: कम्प्यूटर से ऑपरेटर का (कार्य़ करते समय) सम्पर्क इंटरफेस कहलाता है। ये उचित इनपुट हार्डवेयर और डिस्प्ले सॉफ्टवेयर उपलब्ध हो तो ऑपरेटर जो कि डिस्प्ले डिवाइस के सम्पर्क में है अपने कार्य को प्रभावशाली रूप से कर सकता है। हार्डवेयर इंटरफेस ऑपरेटर कम्प्यूटर के मानीटर और इनपुट डिवाइस का एक साथ उपयोग करता है। इनपुट डिवाइस के रूप में प्रायः की बोर्ड या माउस का प्रयोग किये जाते हैं। जब भी की बोर्ड से किसी अक्षर या कैरेक्टर की कुंजी दबाई जाती है तो यह करेक्टर डिस्प्ले स्क्रीन पर कर्सर की स्थिति में दिखाई देता है। कर्सर स्क्रीन पर टिमटिमाता एक चिन्ह होता है जो यह बताता है कि ऑपरेटर द्वारा इनपुट कैरेक्टर कहाँ दिखाई देगा माउस स्क्रीन पर उपस्थित कर्सर या पॉइटंर को इधर-उधर ले जाने का कार्य करता है।