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Tuesday, 3 May 2016

फोटो जर्नलिज्म

फोटोग्राफी का शौक और दुनिया की खबर रखने की आदत, ये दोनों ही चीजें एक फोटो जर्नलिस्ट के काम को बेहद आसान कर देती हैं। यह प्रोफेशन एक अच्छी कमाई के साथ भरपूर रोमांच का भी वादा करता है।

फोटो जर्नलिज्म
फोटोग्राफी संचार का ऐसा माध्यम है, जिसमें भाषा की आवश्यकता नहीं होती है। तस्वीरों के माध्यम से ही घटना का वर्णन हो जाता है। इसका प्रभाव भी सबसे ज्यादा होता है। यही कारण है कि कम्युनिकेशन के विभिन्न माध्यमों में विजुअल्स को सबसे प्रभावी माना जाता है। मीडिया में फोटो जर्नलिज्म की उपयोगिता दिनों-दिन बढ़ती जा रही है और आगे भी बढ़ती रहेगी। यदि किसी में कल्पनाशीलता है और घटना के महत्व को तुरंत समझ सकते हैं, तो उसके लिए फोटो जर्नलिज्म का कोर्स करना बेहतर हो सकता है।
कार्यकोई विशेष घटना, प्राकृतिक आपदा, युद्ध, ग्लैमर न्यूज, कठिन से कठिन परिस्थितियों में घटनास्थल की पूरी कहानी अपने कैमरे में कैद कर लाखों करोड़ों लोगों तक तस्वीरों को पहुंचाना ही फोटो जर्नलिस्ट का कार्य है।

फोटो जर्नलिज्म में चित्रों के जरिए कहानी कही जाती है। इसका संदर्भ प्रिंट पत्रकारिता में स्थिर तस्वीरों से है, जबकि ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में अधिकतर वीडियो फिल्म के जरिए खबर बताई जाती है। एक फोटो पत्रकार रिपोर्टर भी होता है, लेकिन उसे जल्द फैसला लेना होता है। उसे कई अड़चनों जैसे शारीरिक खतरा, मौसम और भीड़भाड़ से भी जूझना पड़ता है।

कैमरा एंगल,लाइट,लेंस आदि की बेहतर जानकारी के साथ साथ खबरों की समझ हो, तो आप कैमरे से मीडिया कैरियर की राह बना सकते हैं।

विजुअल्स की दुनिया में तस्वीर के माध्यम से ही घटना का वर्णन हो जाता है और ऐसे में फोटो जर्नलिस्ट की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण है। यदि आप में कल्पनाशीलता है और आप घटना के महत्व को समझते हैं यानी खबर की गंभीरत से परिचित हैं तो फोटो जर्नलिज्म आपके लिए बड़े काम का कैरियर है।

फोटो जर्नलिस्ट विशेष कवरेज, बड़ी रैलियों, प्राकृतिक आपदा, जंग, ग्लैमर वर्ल्ड, और ऐसी ही मीनिंगफुल घटनाक्रम को पूरी कहानी समेत अपने कैमरे में कैद करता है। ऐसे कवरेज को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बहुत सम्मान मिलता है।

जब तक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का युग नहीं आया था, फोटो जर्नलिस्ट एक कैमरा पर्सन की तरह काम करता था। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया के आने के बाद इनकी एक अलग पहचान बनी है।

किसी भी खबर के लिए फोटो की भूमिका प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों में है। कुशल व प्रशिक्षित फोटो जर्नलिस्ट मीडिया इंडस्ट्री में हाथों हाथ लिए जाते हैं। अखबार और चैनलों के अलावा मैगजीनों आदि में भी फोटो जर्नलिस्ट की काफी मांग रहती है।

वैसे देखा जाए तो फोटो जर्नलिस्ट बनने के लिए विजुअल्स की जानकारी के साथ साथ घटनाक्रम की समझ और कल्पनाशीलता होनी चाहिए। आजकल फोटो जर्नलिस्ट के तौर पर पहचान बनाने के लिए जरूरी है कि व्यक्ति को पुरस्थितियों और समसामयिक घटनाक्रम की जानकारी भी हो।

व्यक्तिगत गुण

इसमें सफल होने के लिए जरूरी है कि तुलनात्मक रूप से नजर पारखी हो तथा कल्पनाशक्ति मजबूत हो। इसके अलावा कठिन परिस्थितियों में भी हमेशा बेहतर करने की कला हो। नित नई-नई तकनीक के साथ-साथ विज्ञान में हो रहे फेरबदल की भी पल-पल की जानकारी जरूरी है।

Monday, 25 April 2016

पत्रकारिता में न करें ऐसे चित्र का प्रयोग


किसी प्रजाति, जाति, रंग, धर्म और राष्ट्रीयता का उपहास करता हो ।

भारत के संविधान के किसी निर्देशक सिद्धांत किसी अन्य उपबंध के विरुद्ध हो ।

 लोगों को अपराध की ओर बढ़ावा देता हो या अशान्ति, हिंसा या कानून भंग करने को बढ़ावा देता हो अथवा किसी भी प्रकार से हिंसा या अश्लीलता को महिमामंडित करता हो

आपराधिक भावना को वांछनीय बतलाता हो

विदेशी राज्यों के साथ् मैत्रीपूर्ण संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता हो

राष्ट्रीय प्रतीक या संविधान के किसी भाग या किसी व्यक्ति या किसी राष्ट्रीय नेता या राज्य के उच्चाधिकारी के व्यक्तित्व का अनुचित लाभ उठाता हो;

सिगरेट और तम्बाकू उत्पादों, मदिरा, शराब और अन्य मादक पदार्थों के बारे में है या उन्हें बढ़ावा देता हो


महिलाओं के चित्रण में सभी नागरिकों की स्थिति एवं अवसर की समानता तथा व्यक्तिगत मान मर्यादा की संवैधानिक गारंटी काउल्लंघन करता हो। विशेषकर, किसी भी ऐसे चित्र की अनुमति नहीं दी जाएगी जिसमें महिलाओं की अपमानजनक छवि प्रस्तुत की गई हो । महिलाओं का चित्रांकन इस ढंग से कदापि नहीं किया जाना चाहिए जो निष्क्रियता एवं दब्बु स्वभाव पर बल देता हो  और परिवार एवं समाज में उनकी अधीनस्थ और गौण भूमिका को प्रोत्साहित करता हो ।   

पत्रकारिता की आचार संहिता

पत्रकारिता की आचार संहिता

·        समाचार देते समय पत्रकार न्यायनिष्ट रहें।

·        जातीय, धार्मिक और आर्थिक मामलों पर लिखते समय विशेष सावधानी और निष्पक्षता बरती जाये

·        समाचारों में तथ्यों को तोडा मरोड़ा न जाये न कोई सूचना छिपायी जाये।

·        व्यावसायिक गोपनीयता का निष्ठा से अनुपालन

·        पत्रकारिता के माध्यम से व्यक्तिगत हितों का पोषण न करें।

·        पत्रकार अपने पद और पहुंच का उपयोग गैर पत्रकारीय कार्यो के लिए न करें।

·        रिश्वत लेकर समाचार छापना या न छापना अवांछनीय, अमर्यादित और अनैतिक है।

·        किसी के व्यक्तिगत जीवन के बारे में अफवाह फैलाने के लिए पत्रकारिता का उपयोग नहीं किया जाये। यह पत्रकारिता की मर्यादा के खिलाफ है। अगर ऐसा समाचार छापने के लिए जनदबाव हो तो भी पत्रकार पर्याप्त संतुलित रहे।

कुछ साल पहले राष्ट्रपति एपीजे अव्दुल कलाम के हस्ताक्षर से एडीटर्स गिल्ड आफ इंडिया ने एक पत्रकार व्यवहार संहिता भी जारी की थी। इसमें भी काफी मनन के बाद कई बिंदुओं को शामिल किया गया था। कुछ प्रमुख बातें इस प्रकार हैं-

·        पर्याप्त समय सीमा के तहत पीड़ित पक्ष को अपना जवाब देने या खंडन करने का मौका दें।

·        किसी व्यक्ति के निजी मामले को अनावश्यक प्रचार देने से बचें।

·        किसी खबर में लोगों की दिलचस्पी बढ़ाने के लिए उसमें अतिश्योक्ती से बचें।

·        निजी दुख वाले दृश्यों से संबंधित खबरों को मानवीय हित के नाम पर आंख मूंद कर न परोसा जाये।मानवाधिकार और निजी भावनाओं की गोपनीयता का भी उतना ही महत्व है।

·        धार्मिक विवादों पर लिखते समय सभी संप्रदायों और समुदायों को समान आदर दिया जाना चाहिए।

·        अपराध मामलो में विशेषकर सेक्स और बच्चों से संबंधित मामले में यह देखना जरूरी है कि कहीं रिपोर्ट ही अपने आप में सजा न बन जाये और किसी जीवन को अनावश्यक बर्बाद न कर दे।


·        चोरी छिपे सुनकर (और फोटो लेकर) किसी यंत्र का सहारा लेकर ,किसी के निजी टेलीफोन पर बातचीत को पकड़ कर ,अपनी पहचान छिपा कर या चालबाजी से सूचनाएं प्राप्त नहीं की जायें। सिर्फ जनहित के मामले में ही जब ऐसा करना उचित है और सूचना प्राप्त करने का कोई और विकल्प न बचा हो तो ऐसा किया जाये।

Thursday, 25 February 2016

हाइपरलिंक्स




हाइपरलिंक्स (hyperlinks), जिन्हें आमतौर पर "लिंक्स" (links) कहा जाता है, इंटरनेट और वेबसाइट्स का महत्वपूर्ण भाग होती हैं। लिंक्स की मदद से उपयोगकर्ता किसी भी फोटो या टेक्सट पर क्लिक करके दूसरे वेब पेज पर पहुँच सकते हैं। इसलिए वह वेबसाइट्स के लिए आवश्यक होती हैं। हाइपरलिंक्स का निर्माण करने के लिए आपको छोटे से एचटीऍमएल" (HTML) कोड की ज़रूरत पड़ेगी। इस कोड का इस्तेमाल करके आप तुरंत एक लिंक का निर्माण कर पाएँगे। इस बारे में और अधिक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

Friday, 12 February 2016

इंटरनेट का प्रयोग, लाभ, उपयोग

इंटरनेट का प्रयोग
 
इंटरनेट का उपयोग मुख्यत: संचार के लिए, जानकारी एकत्रित करने के लिए, शिक्षा, मनोरंजन, वर्तमान विषयवस्तुा, ऑनलाइन सीखना, वाणिज्यर, प्रकाशन आदि के लिए किया जाता है। 
इंटरनेट के उपयोग में, प्रकाशन केवल संगठन या व्यवसायों के लिए उपयोग में नहीं लाया जाता, कोई भी अपनी स्वयं की वेब साइट बना सकता है एवं विश्वयभर में अपनी जानकारी वर्ल्डं वाइड वेब पर प्रकाशित कर सकता है।
 यह संगणक नेटवर्क का एक वैश्विक संग्रह है, जो इंटरनेट के 'कॉमथ्रू' के माध्यरम से डाटा के आदान प्रदान में मदद करता है, विश्वकभर में हजारों लोग अपने घरों, पाठशालाओं, इंटरनेट कॅफेज् एवं कार्यस्थकलों पर जानकारी का उपयोग करने में सक्षम हैं।
•    इंटरनेट सॉफ्टवेयर मानक।  इंटरनेट उपयोगकर्ता कई स्वररूपों में जानकारी को शेयर/साझा कर सकते हैं।
•    उपयोगकर्ता सरलतापूर्वक  साधारण व्यक्तिगत/पर्सनल संगणक के माध्यम से एक इंटरनेट का उपयोग करके जानकारी, विचारों को कनेक्ट कर सकते हैं।
•    हम इंटरनेट खातों के साथ इलेक्ट्रॉनिक मेल (ई-मेल) परिवार के सदस्यों एवं मित्रों को भेज सकते हैं, जो डाक द्वारा पत्र भेजने के समान ही है। ई-मेल मिनटों में भेजा जा सकता है एवं डाक टिकट के न होने से उसे कोई फर्क नहीं पडता।
•    हम जानकारी पोस्ट  कर सकते हैं, जिस पर दूसरे के द्वारा पहुँचा जा सकता है एवं वह प्राय: अद्यतन कर सकते हैं।
•    हम मल्टीमीडिया की जानकारी तक पहुँच प्राप्तं कर सकते हैं जिसमें वीडियो, ऑडियो एवं छवियाँ समाविष्ट  हैं।
•    हम वेब आधारित प्रशिक्षण एवं दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से इंटरनेट पर सीख सकते हैं।
इंटरनेट की विशेषताएँ
भौगोलिक साझेदारी  इंटरनेट की भौगोलिक साझेदारी का निरंतर प्रसार जारी है, विश्व भर में एवं उस से भी परे। इंटरनेट की एक मुख्य विशेषता यह है कि एक बार आपने इस के किसी भी भाग से संपर्क कर लिया, तो आप सब के साथ संवाद कर सकते हैं।

स्थापत्य इंटरनेट का स्थाापत्यए कदाचित ही बनाया गया संचार नेटवर्क है। व्यक्तिगत संगणक या नेटवर्क की विफलता उसकी समग्र विश्वसनीयता को प्रभावित नहीं करेगी। जानकारी समय के साथ या साइटस् के बीच में स्थानांतरण के दौरान नष्ट नहीं होती या बदलती नहीं है।
विश्वाव्याापी पहुँच पहुँच पाना सरल होता है जैसे सामग्री, श्रवण (ऑडियो), दृष्यं (वीडियो) एवं विश्वतव्या।पी स्त्र पर बहुत कम कीमत में उपलब्ध  है। सभी इंटरनेट तक पहुँच पा सकते हैं फिर चाहे वह कहीं भी हों। कोई भी किसी भी संगणक से कनेक्ट कर सकता है एवं कई स्थाभनों की सैर कर सकता है एवं वह भी बिना अपनी कुर्सी छोडे।
 इंटरनेट का लाभ

 
•    इंटरनेट डाटा एवं सूचना माध्यम की विविधताओं से भरा हुआ है।
•    यहाँ ऑनलाइन खोज इंजन उपलब्ध हैं, शीघ्रगति एवं शक्तिशाली।
•    इंटरनेट प्रयोग करने में आसान है।
•    डाटा तक सरलतम पहुँच होने कारण हम आसानी से शोधकर्ता बन सकते हैं।
•    लोग दुनिया के साथ काम ऑनलाइन शेयर करने के‍ लिए प्रेरित हो रहे हैं।
•    इंटरनेट में विभिन्न शिक्षण शैलियाँ हैं।
•    कागज के विपरीत वेब गतिशील डाटा स्रोत प्रस्तु त कर सकता है जो समय के साथ बदलते हैं।
•    ई-मेल में लंबी दूरी पर भेजे जाने पर भी अक्षर बदलते नहीं हैं न ही मिश्रित होते हैं।
•    हम विश्वमभर के पुस्तकालयों तक पहुँच प्राप्तक कर सकते हैं।
इंटरनेट सीखने की सामग्री का एक बहुत बड़ा भंडार है। परिणामस्व रूप, यह अर्थपूर्ण ढंग से संसाधनों का विस्ताटर कर रहा है जो मानक प्रिंट पुस्तकालयों में मिली सामग्री से परे, हर एक के लिए उपलब्ध हैं। हम सरकारी एवं गैर-सरकारी वेबसाइटस् पर नवीनतम रिपोर्ट प्राप्तै कर सकते हैं जिसमें शोध परिणाम, संग्रहालयों एवं कला दीर्घाओं में वैज्ञानिक एवं कलात्मक संसाधन, एवं अन्य संगठन जिसमें सीखने पर लागू करने के लिए जानकारी का समावेश होता है। कठिनतम अनुसंधान परियोजना उपक्रमों में इंटरनेट का प्रयोग किया जा सकता है।

इंटरनेट सीखने के लिए एक शक्तिशाली संसाधन है, एवं संचार का एक दक्ष साधन है। यह शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी है एवं सीखने के बहुत सारे लाभ प्रदान करता है। इस में स्वतंत्र शिक्षण एवं अनुसंधान कुशलता के विकास का भी समावेश है। सीखने के क्षेत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला से परे विशिष्टण विषय की पहुँच को बढा कर, साथ ही एकीकृत या पार-पाठ्यचर्यात्मक अध्ययन एवं संचार तथा सहयोग करना जैसे इस तरह के संसाधनों का उपयोग करने के लिए सीखने की प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने की क्षमता, संसाधनों की रचना एवं दूसरों के साथ संवाद।
 
इंटरनेट का उपयोग

 
छात्रों एवं बच्चों के संचार एवं सहयोग के कौशल विकास के लिए इंटरनेट एक उत्कृजष्टं उपकरण है। इन सबसे ऊपर, इंटरनेट भाषा कौशल निर्माण का एक प्रभावी साधन है।
ई-मेल चर्चा समूह एवं चैट रूम्स  के माध्यिम से छात्र लिखित रूप में संचार के आधारभूत सिद्धांत सीखते हैं। इस से शिक्षकों को सामान्य साक्षरता कार्यक्रमों में इंटरनेट आधारित गतिविधियों को समाविष्ट  करने एवं उनकी शिक्षा रणनीतियों को विविधताएँ लाने के अवसर देता है।
सहयोगात्मक परियोजनाओं का उद्देश्ये साक्षरता कौशल विकास, सामान्य्त: ई-मेल के माध्यम से अन्य पाठशालाओं या अन्य देशों में भी अपने साथियों के साथ संदेश का हो सकता है। सहयोगी परियोजना भी छात्रों को व्यास्तय रखने एवं सीखने के महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान करने के लिए उपयोगी होते हैं।इस प्रकार, इंटरनेट प्रगामी आंतर-सांस्कृखतिक समझ को आगे बढ़ाने का एक प्रभावी का साधन हो जाता है। संयमी चैट कक्ष एवं समूह परियोजना भी छात्रों को एकत्रित सीखने के लिए अवसर प्रदान कर सकते हैं।

इंटरनेट

इंटरनेट

इंटरनेट के लिए विभिन्‍न परिभाषाएँ हैं परंतु उन सब का एक ही अर्थ है जो नीचे दिखाया गया है।
परिभाषा 1: अंतर्संबध्‍द नेटवर्कस् की श्रृंखला जो विश्‍व के लाखों संगणकों द्वारा आवेष्टित किए हुए डाटा का संचार करने की अनुमति देता है।
परिभाषा 2: एक वैश्विक संचार नेटवर्क जो विश्‍व के लाखों संगणकों को कनेक्ट करने एवं जानकारी का विनिमय करने की अनुमति देता है।
परिभाषा 3:संगणक नेटवर्क की एक विश्वव्यापी प्रणाली, नेटवर्कस् का एक नेटवर्क जिसमें एक संगणक के उपयोगकर्ता किसी दूसरे संगणक से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

'इंटरनेट' शब्द का वास्तविक अर्थ 'नेटवर्कस् का नेटवर्क' है। इंटरनेट में हजारों विश्‍वव्‍यापी लघु क्षेत्रीय नेटवर्क होते हैं। एशियाई देशों में किसी भी दिन यह विश्‍वभर में लगभग 80 लाख उपयोगकर्ताओं को जोड़ता है।
इंटरनेट को वैश्विक नेटवर्क के एक भौतिक अंश के रूप में संदर्भित किया जाता है। यह केबल एवं संगणकों का एक विशाल संग्रह है। इंटरनेट का कोई भी 'स्‍वामी' नहीं है, यद्यपि, कुछ एकसाथ जोडनेवाली कंपनियाँ हैं जो नेटवर्क के विभिन्‍न भागों का प्रबंधन करने में मदद करती हैं, कोई भी एकल अधिशासी निकाय नहीं है जो इंटरनेट पर होनेवाली गतिविधियों का नियंत्रण करता हो। विभिन्न देशों के भीतर नेटवर्क को प्रायोजक वित्तीय सहायता देते हैं एवं स्थानीय प्रक्रिया के अनुसार प्रबंधन करते हैं।

इंटरनेट एक वैश्विक नेटवर्क है जो पूरी दुनिया के कम्प्यूटरों को एक साथ जोड़ता है। इसने रोज के कार्यों की प्राप्ति को बेहद आसान बनाया है जो कि एक समय कठिन लंबा और समय लेने वाला था । हमलोग बिना इसके अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते जिसको इंटरनेट कहा जाता है। जैसाकि इस धरती पर हर चीज का एक फायदा-नुकसान होता है उसी तरह इंटरनेट का भी हमारे जीवन का अच्छा और बुरा प्रभाव है। इंटरनेट की वजह से ही ऑनलाइन संचार बहुत ही सरल और आसान हो गया है। पुराने समय में संचार का माध्यम पत्र होता था जोकि लंबा समय लेने वाला और कठिन होता था क्योंकि इसके लिये किसी एक को लंबी दूरी तय कर संदेश पहुँचाना पड़ता था। लेकिन अब, कुछ सोशल नेटवर्किग साइट को खोलने के लिये हमें सिर्फ इंटरनेट से जुड़ने की जरुरत है साथ ही जी-मेल, याहू आदि अकांउट के द्वारा सेकेंडो में ही संदेश को भेजा जा सकता है।

मेट्रों, रेलवे, व्यापारिक उद्योग, दुकान, स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थान, एनजीओ, विश्वविद्यालय, कार्यालय (सरकारी तथ गैर-सरकारी) में हर डाटा को कंप्यूरीकृत करके बड़े स्तर पर कागज और कागजी कार्यों से बचा जा सकता है। इसके माध्यम से एक जगह से पूरे विश्व के बारे में समय-समय पर खबर जाना जा सकता है। ढ़ेर सारी जानकारीयों को जमा करने में ये बहुत दक्ष और प्रभावकारी है चाहे वो किसी भी विषय से संदर्भित हो चंद सेकेंड में ही उपलब्ध हो जाएगा। ये शिक्षा, यात्रा, और व्यापार में बहुत उपयोगी है। इसके द्वारा ऑनलाइन पब्लिक लाइब्रेरी, टेक्स्टबुक, तथा संबंद्ध विषयों तक पहुँच आसान हुई है।

पहले के समय में जब लोग बिना इंटरनेट के थे, उन्हे कई प्रकार के कार्यों के लिये लंबे समय तक लाइन में लगना पड़ता था जैसे रेलवे का टिकट लेने के लिये। लेकिन आधुनिक समय में लोग बस एक क्लिक से टिकट की बुकिंग कर सकते है साथ ही एक सॉफ्ट कॉपी अपने मोबाईल फोन में भी रख सकते है। इंटरनेट की दुनिया में, किसी एक को ये जरुरी नहीं कि लंबी दूरी तय करके वो अपने किसी व्यापारिक मुलाकात या किसी और काम के लिये यात्रा करे। कोई भी विडियों कॉनप्रेंसिंग, कॉलिंग, स्काईप या दूसरे तरीकों से अपनी जगह पर रह कर ही बैठक का हिस्सा बन सकता है। इंटरनेट हमें कई तरीकों से फायदा पहुँचाता है जैसे ऑनलाइन स्कूल, कॉलेज, या विश्वविद्यालयों में दाखिला दिलाने में, व्यापारिक और बैंकिंग लेन-देन में, शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति में, ड्राइविंग लाइसेंस आवेदन करने में, बिल जमा करने आदि में मदद करता है।

आधुनिक समय में, पूरी दुनिया में इंटरनेट एक बहुत ही शक्तिशाली और दिलचस्प माध्यम बनता जा रहा है। ये एक नेटवर्कों का नेटवर्क है और कई सारी सेवाओं तथा संसाधनों का समूह है जो हमें कई प्रकार से लाभ पहुँचाता है। इसके इस्तेमाल से हमलोग कहीं से भी वर्ल्ड वाइड वेब तक पहुँच सकते है। ये हमें बड़ी तादाद में सुविधा मुहैया कराता है जैसे-ईमेल, सर्फिंग सर्च इंजन, सोशल मीडिया के द्वारा बड़ी हस्तियों से जुड़ना, वेब पोर्टल तक पहुँच, शिक्षाप्रद वेबसाइटों को खोलना, रोजमर्रा की सूचनाओं से अवगत रहना, विडियो बातचीत आदि। ये सभी का सबसे अच्छा दोस्त बनता है। आधुनिक समय में लगभग हर कोई इंटरनेट का इस्तेमाल विभिन्न उद्देश्यों के लिये कर रहा है। जबकि हमें अपने जीवन पर इससे पड़ने वाले फायदे-नुकसान के बारे में भी जानना चाहिये।

विद्यार्थीयों के लिये इसकी उपलब्धता जितनी लाभप्रद है उतनी ही नुकसानदायक भी क्योंकि बच्चे अपने माता-पिता के चोरी से इसके माध्यम से गलत वेबसाइटों का भी इस्तेमाल करते है जोकि उनके भविष्य को नुकसान पहुँचा सकता है। ज्यादातर माता-पिता इस खतरे को समझते है लेकिन कुछ इसे नज़रअंदाज कर देते है और खुलकर इंटरनेट का इस्तेमाल करते है। इसलिये घर में बच्चों द्वारा इंटरनेट का इस्तेमाल अभिवावकों की देखरेख में होनी चाहिये।

अपने कम्प्यूटर सिस्टम में पासवर्ड और प्रयोक्ता नाम डाल कर अपने खास डाटा को दूसरों से सुरक्षित रख सकते है। इंटरनेट हमें किसी भी ऐप्लिकेशन प्रोग्राम के द्वारा अपने दोस्त, माता-पिता और शिक्षकों को किसी भी क्षण संदेश भेजने की आजादी देता है। ये जान कर हैरानी होगी कि उत्तरी कोरिया, म्यांमार आदि कुछ देशों में इंटरनेट पर पाबंदी है क्योंकि वो इसे बुरा समझते है। कभी-कभी इंटरनेट से सीधे-तौर पर कुछ भी डाउनलोड करने के दौरान, हमारे कम्प्यूटर में वाइरस, मालवेयर, स्पाइवेयर, और दूसरे गलत प्रोग्राम आ जाते है जो हमारे सिस्टम को नुकसान पहुँचा सकते है। ऐसा भी हो सकता है कि हमारे सिस्टम में रखे डाटा को बिना हमारी जानकारी के पासवर्ड होने के बावजूद भी इंटरनेट के द्वारा हैक कर लिया जाये।

वर्ल्ड वाइड वेब

सामान्‍यत:, हर कोई सोचता है कि इंटरनेट एवं वेब एक ही हैं परंतु यह गलत है।
वेब एक सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग या सेवा है जिसे इंटरनेट पर चलाया जाता है। यह दस्तावेज़ एवं संसाधनों का एक संग्रह है। यह इंटरनेट के तीव्र वृध्दिंगत होते हुए भागों में से एक है। यह संगणकों पर संग्रहित विश्‍वव्‍यापी जानकारी की एक बड़ी सीमा तक सुगम पहुँच प्रदान करता है।
वेब साइट क्या है

वेब साइट में करोडों अंतसंर्बध्‍द पृष्ठ होते हैं, वेब साइट के चारों ओर आपको आपका मार्ग खोजने में मदद करनेवाले हाइपरलिंक्स होते हैं। आपको वेब पर विभिन्न प्रकार की जानकारी मिलेगी जैसे - खेल, स्वास्थ्य के मामले, छुट्टियों का गंतव्य, रेलगाडी की समयसारणी, मौसम की भविष्यवाणी एवं कई अधिक तरह की जानकारी आप ढूँढ सकते हैं। इंटरनेट पर लाखों वेब साइट उपलब्ध हैं, एवं आपकी रूचि के अनुरूप किसी भी चीज को आप ढूँढ सकते हैं।

वेब पता
प्रत्येक वेब साइट का अपना एक विशिष्ट पता होता है, जो यूनिफ़ॉर्म रिसोर्स लोकेटर या यूआरएल कहलाता है। किसी साइट पर जाने के लिए, अपने वेब ब्राउज़र की पता पट्टी/ऍड्रेस बार में अपनी रूचिनुसार पते को टाइप करने की आवश्यकता है।

Monday, 8 February 2016

कंप्यूटर ग्राफिक्स

कंप्यूटर ग्राफिक्स

कंप्यूटर ग्राफिक्स कंप्यूटर के सहयोग से सृजित ग्राफिक्स यानि रेखाचित्र होते हैं। इनमें अधिकांशतः चित्र डाटा का कंप्यूटर के द्वारा प्रदर्शन और परिवर्तन किया गया होता है। कंप्यूटर ग्राफ़िक्स के विकास से कंप्यूटरों के कई प्रकार के डाटा को समझने, भाषांतर करने और प्रयोग करने के अनुभव बढ़े हैं। कंप्यूटर ग्राफ़िक्स के क्षेत्र में विकास के साथ एनिमेशन, मूवीज़ और वीडियो खेलों में बहुत बड़ी प्रगति हुई है।


अडोबी पेजमेकर
पेजमेकर अडोबी द्वारा विकसित एक पेज लेआउट सॉफ्टवेयर है। यह डीटीपी के कार्यों में काफी प्रयुक्त होता है। इसका नवीनतम संस्करण अडोबी इनडिजाइन के नाम से है। अभी भी भारत में पेजमेकर का छोटे-मोटे व्यवसायों एवं दुकानों में काफी कार्य होता है।
पब्लिशिंग के क्षेञ में पेजमेकर सदैव अग्रणी रहा है, पेजमेकर को एल्‍डस कम्‍पनी ने बनाया और बाद में इसे एडोब कॉरपोरेश ने ग्रहण किया, तब से इसकी साख और बढ गयी, वैसे तो पेजमेकर के बहुत से संस्‍करण मार्केट में आये लेकिन पेजमेकर के सॉतवे संस्‍करण या वर्जन में कुछ ऐसे तत्‍व जोडे गये कि इसमें पब्लिशिंग का कार्य बहुत तेजी से होने लगा, इस सॉफ्टवेयर में हम विजिटिंग कार्ड, बायोडाटा, किताबें, मैगजीन, अखबार लैटरपैड, पैम्‍पलेट आदि डिजायन कर सकते हैं 

पेजमेकर की एक मुख्य कमी है कि यह इण्डिक यूनिकोड का समर्थन नहीं करता, जिस कारण इसमें यूनिकोड हिन्दी (अथवा कोई अन्य इण्डिक भाषा) टाइप नहीं की जा सकती। अत: छपाई सम्बंधी कार्यों के लियेनॉनृ-यूनिकोड हिन्दी (इण्डिक) फॉण्टों का सहारा लेना पड़ता है।
अधिकतर नॉन-यूनिकोड फॉण्ट रेमिंगटन लेआउट का प्रयोग करते हैं, जिन्हें रेमिंगटन का अभ्यास न हो उनको पहले किसी अन्य औजार में टैक्स्ट टाइप करके फिर उसे कॉपी कर पेजमेकर में पेस्ट करना पड़ता है। फोनेटिक द्वारा नॉन-यूनिकोड फॉण्ट में टाइप करने के लिये हिन्दीपैड, तथा बरह डायरॅक्ट नामक तथा इनस्क्रिप्ट द्वारा टाइप करने के लिये माध्यम नामक औजार का प्रयोग किया जा सकता है।
पेजमेकर के नये संस्करण इनडिजाइन में हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं का समर्थन सक्षम करने हेतु इण्डिकप्लस नामक एक प्लगइन उपलब्ध है।

क्वॉर्क एक्सप्रेस
यह एक कंप्यूटर एप्लीकेशन है जो कि पेज लेआउट के लिए उपयोग किया जाता है। यह मैक और विंडोज पर रन करता है। इसे सबसे पहले 1987 में लॉन्च किया गया था।

स्प्रेडशीट

स्प्रेडशीट

स्प्रेडशीट आपको बज़ट और व्यवसायिक योजना बनाने में मदद करती है। ऐसी रिपोर्ट जिसमें गणित शामिल हो, स्प्रेडशीट काम आती है।
स्प्रेडशीट एक कंप्यूटर अनुप्रयोग है जो कार्यपत्रक का हिसाब करने वाले एक कागज़ की नकल है। यह कई कक्षों को प्रदर्शित करता है जो एकसाथ मिलकर एक जाल बनाते हैं जिनमें पंक्तियां और स्तंभ शामिल होते हैं, प्रत्येक कक्ष में अल्फ़ान्यूमेरिक पाठ, संख्यात्मक मूल्य, या सूत्र शामिल होते हैं। एक सूत्र यह परिभाषित करता है कि उस कक्ष की अंतर्वस्तु की किसी अन्य कक्ष (या कक्षों के संयोजन) की अंतर्वस्तु से, जब भी कोई कक्ष अद्यतन किया जाता है तो कैसे गणना की जा सकती है। स्प्रेडशीट का इस्तेमाल वित्तीय जानकारी के लिए अक्सर किया जाता है इसका कारण है एक एकल कक्ष में बदले जाने के बाद भी संपूर्ण पत्रक की स्वतः ही पुन: गणना कर लेने की क्षमता.

"स्प्रेडशीट" शब्द "स्प्रेड" से आया है जो एक अखबार या पत्रिका की वस्तु (टेक्स्ट/या ग्राफिक्स) के भाव से लिया गया है जिसमें दो पृष्ठ आमने-सामने शामिल होते हैं, जो मध्य के मोड़ से दोनो ओर फैली हुई होती है और दोनों ही पृष्ठों को एक बड़ा पृष्ठ माना जाता है। मिश्रित शब्द "स्प्रेड-शीट" उस प्रारूप के अर्थ के रूप में सामने आया है जो बहीखाता खातों के प्रस्तुत करने में उपयोगी होता है - जिसमें ऊपरी भाग के आर पार व्यय की श्रेणियों के लिए कॉलम बने होते हैं, बाएं मार्जिन के नीचे चालानों को सूचीबद्ध किया जाता है और प्रत्येक भुगतान की राशि को उन कक्षों में डाला जाता है जहां इसके स्तंभ और पंक्तियां प्रतिच्छेद करती हैं - जो पारंपरिक रूप से जिल्दबंद खाते के दो आमने-सामने के पृष्ठों के आर-पार "फैली" हुई होती है (लेखांकन रिकॉर्ड रखने के लिए पुस्तक) या वृहदाकार कागज के शीटों पर जो धारियों द्वारा पंक्तियों और स्तंभों में ऊसी प्रारूप में और सामान्य कागजों से लगभग दोगुनी व्यापक होती है।

वर्तमान स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर्स

बंद स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर्स

वर्ड प्रोसेसिंग

वर्ड प्रोसेसिंग
इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके आप लिख सकते हैं, दस्तावेज में कांट छांट कर सकते हैं, रिपोर्ट और अन्य डॉक्यूमेंट तैयार कर सकते हैं।

Word processing is the phrase used to describe using a computerto create, edit, and print documents. Of all computer applications, word processing is the most common. To perform word processing, you need a computer, a special program called a word processor, and a printer. A word processor enables you to create a document,store it electronically on a disk, display it on a screen, modify it by entering commands and characters from the keyboard, and print it on a printer.

Word processing software is used to manipulate text and apply a basic design to your pages. Word processing software is used to manipulate a text document, such as a resume or a report. You typically enter text by typing and the software provides tools for copying, deleting and various types of formatting. Some of the functions of word processing software include:

Creating, editing, saving and printing documents.
Copying, pasting, moving and deleting text within a document.
Formatting text, such as font type, bolding, underlining or italicizing.
Creating and editing tables.
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सॉफ्टवेयर

'सॉफ्टवेयरउन प्रोग्रामों को कहा जाता है, जिनको हम हार्डवेयर पर चलाते हैं। किसी भी कम्प्यूटर को चलाने के लिये जो सबसे आवश्यक सॉफ्टवेयर है वह है ऑपरेटिंग सिस्टम. ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना आप कम्प्यूटर में काम नहीं कर सकते.

ऑपरेटिंग सिस्टम: ऑपरेटिंग सिस्टम व्यवस्थित रूप से जमे हुए साफ्टवेयर का समूह है जो कि आंकडो एवं निर्देश के संचरण को नियंत्रित करता है। आपरेटिंग सिस्टम हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर के बीच सेतु का कार्य करता है। कम्प्यूटर का अपने आप में कोई अस्तित्व नही है। यह केवल हार्डवेयर जैसे की-बोर्ड, मॉनिटर, सी.पी.यू इत्यादि का समूह है। आपरेटिंग सिस्टम समस्त हार्डवेयर के बीच सम्बंध स्थापित करता है। आपरेटिंग सिस्टम के कारण ही प्रयोगकर्ता को कम्प्यूटर के विभिन्न भागों की जानकारी रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। साथ ही प्रयोगकर्ता अपने सभी कार्य तनाव रहित होकर कर सकता है। यह सिस्टम के संसाधनों को बांटता एवं व्यवस्थित करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम के कई अन्य उपयोगी विभाग होते है जिनके कई काम केन्द्रिय प्रोसेसर द्वारा किए जाते है। उदाहरण के लिए आप प्रिटिंग का कोई काम करें तो केन्द्रिय प्रोसेसर आवश्यक आदेश देकर वह कार्य आपरेटिंग सिस्टम पर छोड देता है और वह स्वयं अगला कार्य करने लगता है। इसके अतिरिक्त फाइल को पुनः नाम देना, डायरेक्टरी की विषय सूची बदलना, डायरेक्टरी बदलना आदि कार्य आपरेटिंग सिस्टम के द्वारा किए जाते है।

आज जो सबसे प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम हैं वह माइक्रोसॉफ्ट कंपनी द्वारा बनाये गये हैं। इनमें डॉस (DOS), विंडोज-98, विंडोज-एक्स पी, विंडोज-विस्टा प्रमुख हैं। लेकिन इन सभी को कम्प्यूटर के साथ आपको खरीदना पड़ता है। यदि आप मुफ्त का ऑपरेटिंग सिस्टम प्रयोग करना चाहते हैं तो उसके लिये लिनक्स के कई ऑपरेटिंग सिस्टम हैं जो पूरी तरह मुफ्त हैं। इनमे से कई विंडोज से कई मायने में बेहतर भी हैं लेकिन इनको सीखने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। चुंकि अभी विंडोज ही बहु-प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम है इसलिये हम उसी से संबंधित उदाहरणों का प्रयोग इस लेख में करेंगे.


एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर: एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर आपके रोज मर्रा की जरूरत को पूरा करते हैं। जैसे यदि आप यदि कुछ लिखना चाहें तो उसके लिये विंडोज में नोटपैड व वर्डपैड है। इसके अलावा आप ओपन ऑफिस का प्रयोग कर सकते हैं जो मुफ्त है या माइक्रोसोफ़्ट ऑफिस खरीद सकते हैं जिसमें से आप माइक्रोसॉफ्ट वर्ड का उपयोग लिखने के लिये कर सकते हैं। इसके अलावा आप डाटा के गणितीय, सांख्यिकीय उपयोग के लिये माइक्रोसॉफ्ट एक्सल और प्रजेंटेशन बनाने के लिये पावर पॉइंन्ट का उपयोग कर सकते हैं। किसी भी प्रकार की ड्राइग के लिये विंडोज में पेन्ट नाम का सॉफ्टवेयर होता है यदि आपको एडवांस ड्राइंग करनी है तो आप गिम्प (GIMP) का प्रयोग कर सकते हैं जो कि मुफ्त है या फिर अडोब कंपनी का फोटोशॉप सॉफ्टवेयर खरीद सकते हैं।

Wednesday, 3 February 2016

मेमोरी

प्राइमरी मेमोरी: यह वह युक्तियाँ होती हैं जिसमें डेटा व प्रोग्राम्स तत्काल प्राप्त एवं संग्रह किए जाते हैं।
रीड-राइट मेमोरी, रैम (RAM): इस मेमोरी में प्रयोगकर्ता अपने प्रोग्राम को कुछ देर के लिए स्टोर कर सकते हैं। साधारण भाषा में इस मेमोरी को RAM कहते हैं। यही कम्प्यूटर की बेसिक मेमोरी भी कहलाती है। यह दो प्रकार की होती है:

डायनेमिक रैम (DRAM): डायनेमिक का अर्थ है गतिशील। इस RAM पर यदि 10 आंकड़े संचित कर दिए जाएं और फिर उनमें से बीच के दो आंकड़े मिटा दिए जाएं, तो उसके बाद वाले बचे सभी आंकड़े बीच के रिक्त स्थान में स्वतः चले जाते हैं और बीच के रिक्त स्थान का उपयोग हो जाता है।
स्टैटिक रैम (SRAM): स्टैटिक रैम में संचित किए गए आंकड़े स्थित रहते हैं। इस RAM में बीच के दो आंकड़े मिटा दिए जाएं तो इस खाली स्थान पर आगे वाले आंकड़े खिसक कर नहीं आएंगे। फलस्वरूप यह स्थान तब तक प्रयोग नहीं किया जा सकता जब तक कि पूरी मेमोरी को “वाश” करके नए सिरे से काम शुरू न किया जाए।

रीड ओनली मेमोरी, ROM (Read Only Memory): ROM उसे कहते हैं, जिसमें लिखे हुए प्रोग्राम के आउटपुट को केवल पढ़ा जा सकता है, परन्तु उसमें अपना प्रोग्राम संचित नहीं किया जा सकता। ROM में अक्सर कम्प्यूटर निर्माताओं द्वारा प्रोग्राम संचित करके कम्प्यूटर में स्थाई कर दिए जाते हैं, जो समयानुसार कार्य करते रहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर ऑपरेटर को निर्देश देते रहते हैं। बेसिक इनपुट आउटपुट सिस्टम ( BIOS) नाम का एक प्रोग्राम ROM का उदाहरण है, जो कम्प्यूटर के ऑन होने पर उसकी सभी इनपुट आउटपुट युक्तियों की जांच करने एवं नियंत्रित करने का काम करता है।


सेकेंडरी मेमोरी: यह एक स्थाई संग्रहण युक्ति है। इसमे संग्रहित डेटा तथा प्रोग्राम्स कम्प्यूटर के ऑफ होने के बाद भी इसमे स्थित रहते है।

मैगनेटिक टेप: डाटा को स्थाई तौर पर संग्रहित कर सकने वाले उपकरणों में मैगनेटिक टेप का नाम प्रमुखता से आता है। इसमें ½ इन्च चौड़ाई वाली प्लास्ट्रिक की बिना जोड़ वाली लम्बी पटी होती है। जिस पर फैरोमेग्नेटिक पदार्थ की पर्त चढ़ाई जाती है। इस पट्टी को ही हम टेप कहते हैं। टेप विभिन्न लम्बाइयों में उपलब्ध होता है। प्रायः 400, 800, 1200 या 2400 फीट लम्बाई वाले मैगनेटिक टेप उपलब्ध होते हैं।टेप पर डाटा मेगनेटाइज्ड या नॉन मैगनेटाईज्ड बिन्दुओं के रूप में लिखा जाता है। एक अक्षर के लिए 7 बिट या 9 बिट कोड प्रयोग में लाया जाता हैमैगनेटाइज्ड एवं नॉन मैगनेटाइज्ड बिन्दुओं की कतारें टेप की लम्बाई के समानान्तर बन जाती है। इन्हें हम Tracks कहते हैं।

मैगनेटिक डिस्क: मैगनेटिक डिस्क की तुलना रिकार्ड प्लोयर के लॉग प्लेविंग L.P. रिकार्ड से कर सकते हैं। ऐसे कई रिकार्डस या डिस्क को एक के ऊपर एक कुछ अन्तर से लगा दिया जाय तो वे मैगनेटिक डिस्क के समान दिखेगें। सभी डिस्क एक के ऊपर एक समान्तर लगी होती है। सभी डिस्कों के बने इस माध्यम को डिस्क पैक कहते हैं। डिस्क पैक में 11 अथवा 20 ऐसी सतहें होती है। प्रायः सबसे ऊपरी तथा सबसे निचली सतह पर डाटा नहीं लिखा जाता है। इस ड्राइव में रीड व राइट हेड लगे होते हैं। जो डाटा को लिखने और पढ़ने का काम करते हैं। ये डाटा को Tracks के रूप में डिस्क पैक पर लिखते हैं।

फ्लॉपी डिस्क: यह एक छोटी लचीली डिस्क होती है जिसकी डाटा संग्रह करने की क्षमता बहुत अधिक नहीं होती। कीमत की लिहाज से यह बहुत सस्ती होती है। एक लचीली प्लास्टिक शीट के ऊपर मैगनेटिक ऑक्साइड कोटिंग करके इसे तैयार किया जाता है। इसके एक रीड/राइट हेड होता है जो फ्लॉपी की सतह से स्पर्श करके डाटा लिखता व पढ़ता है। ये  १.४४ और २.८८ MB कि क्षमता में उपलब्ध होती है. फ्लापी डिस्क कि तरह ही एक ZIP डिस्क होता है जिसकी क्षमता १०० MB होती है.

पेन ड्राइव: ये एक एक्सटर्नल स्टोरेज होता है जिसे हम सीधे USB पोर्ट पर लगा सकते हैं. ये इस्तेमाल करने में बहुत आसन होता है और आसानी से उपलब्ध भी है. इसकी डाटा संग्रह करने कि क्षमता भी ज्यादा होती है. ये सामान्यतः १, २, ४, ८, १६ GB या उससे भी अधिक क्षमता में उपलब्ध है. यही कारण है कि आजकल इसका अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा है.

CD/DVD ड्राइव: ये भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले स्टोरेज डिवाइस में से है. ये सस्ती होती है और इसकी संग्रहण क्षमता काफी अधिक होती है. आम  तौर पर एक CD की संग्रहण क्षमता ७००-८०० MB और एक DVD की अधिकतम क्षमता १७ GB होती है.

हार्ड डिस्क ड्राइव: ये किसी भी कम्पुटर की सबसे मुख्य स्टोरेज डिवाइस होती है. इसकी संग्रहण क्षमता बहुत अधिक होती है इसलिए ये कंप्यूटर के मुख्य संग्रहनक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. आजकल हार्ड डिस्क ड्राइव ४०, ८०, १६०, ३२०, ५०० GB या उससे अधिक क्षमता में उपलब्ध है.

इनपुट और आउटपुट डिवाइस

इनपुट डिवाइस: जिन युक्तियों का प्रयोग डेटा और निर्देशों को कम्प्यूटर में प्रविष्ट करने के लिए किया जाता है, वे सभी युक्तियां आगम अथवा इनपुट युक्तियां कहलाती हैं। यह भी कहा जा सकता है कि मानवीय भाषा में प्रविष्ट किए जा रहे डेटा अथवा प्रोग्राम को कम्प्यूटर के समझने योग्य रूप में परिवतर्तित करने के लिए प्रयोग की जाने वाली युक्तियों को इनपुट युक्तियां कहा जाता है। ये युक्तियां अक्षरों, अंकों तथा अन्य विशिष्ट चिन्हों को बायनरी डिजिट अर्थात 0 तथा 1 में परिवर्तित करके सी.पी.यू. के समझने योग्य बनाती हैं। इनपुट के लिए सबसे अधिक प्रयुक्त की जाने वाली युक्ति की-बोर्ड और माउस है।  इन्हें अलग अलग श्रेणियों में बात जा सकता है. कुछ और इनपुट डिवाइस हैं:


की-बोर्ड
टैकर बॉल
लाइट पेन
जायस्टिक
हैण्ड-हैल्ड टर्मिनल
बार-कोड रिकॉगनेशन
OMR, OCR एवं MICR
स्कैनर
माइक

ऑन लाइन इनपुट डिवाइसेज: यह वह युक्तियाँ हैं जिससे हम सिस्टम में सीधे इनपुट प्रदान कर सकते हैं। यह सिस्टम से जुड़े रहते हैं। उदाहरण - माऊस ,की-बोर्ड ,लाइट पेन ,जायस्टिक आदि।
ऑफ लाइन इनपुट डिवाइसेज: यह वह युक्तियाँ हैं जिसमे सिस्टम में जोड़ने से पहले हम इनपुट तैयार कर लेते हैं और फिर आवश्यकता अनुसार उनसे इनपुट पढ़ने के लिए उन्हें हम सिस्टम से जोड़ लेते हैं। उदाहरण - की से पंच कार्ड, की से टेप सिस्टम आदि।

कुछ डिवाइस ऐसे होते हैं जो इनपुट में भी आते हैं और आउटपुट में भी
आउटपुट डिवाइस: निर्गम उपकरण से तात्पर्य ऐसे उपकरणों से होता है जो कि किसी संगणना के परिणामों को निर्गम तक पहुंचाते हैं। ये परिणाम दृश्य प्रदर्शन इकाई द्वारा दिखलाये जा सकते हैं, प्रिन्टर द्वारा मुद्रित कराये जा सकते हैं, चुम्बकीय माध्यमों पर संग्रहित किये जा सकते हैं अथवा अन्य किसी विधि द्वारा यह निर्गम प्राप्त किये जा सकते हैं। एक कम्प्यूटर प्रणाली के विभिन्न अवयवों में कई उपकरण जो कि चुम्बकीय सिद्धान्तों पर कार्य करते हैं. कम्प्यूटर में आंकड़ों के आगम एवं निर्गम दोनों ही उपयोगों हेतु प्रयोग किये जाते हैं निर्गम युक्तियाँ दो प्रकार की होती है:
हार्ड कॉपी युक्तियाँ: यह वह युक्तियाँ हैं जिससे हम कागज पर आउटपुट प्राप्त कर सकते हैं । जैसे प्रिन्टर, प्लॉटर
सॉफ्ट कॉपी युक्तियाँ: यह वह युक्तियाँ हैं जिससे हम सिस्टम पर अस्थाई रूप में आउटपुट प्राप्त कर सकते हैं जैसे मॉनिटर, L.C.D इत्यादि.

Wednesday, 25 February 2015

वेब पत्रकारिता




वेब पत्रकारिता को हम इंटरनेट पत्रकारिता, ऑनलाइन पत्रकारिता, सायबर पत्रकारिता आदि नाम से जानते हैं. जैसा कि वेब पत्रकारिता नाम से स्पष्ट है यह कंप्यूटर और इंटरनेट के सहारे संचालित ऐसी पत्रकारिता है जिसकी पहुँच किसी एक पाठक, एक गाँव, एक प्रखंड, एक प्रदेश, एक देश तक नहीं बल्कि समूचा विश्व है और जो डिजिटल तंरगों के माध्यम से प्रदर्शित होती है. भारत में बढ़ते संचार साधनों से पत्रकारिता के क्षेत्र में भी करियर के अवसर उजले हुए हैं. दिनोदिन समाचार चैनलों, अखबारों की संख्या बढ़ती जा रही है.
 
पत्रकारित्रा पहले जहां अखबारों, पुस्तकों में हुआ करती थी, वहीं इंटरनेट के बढ़ते प्रचलन के बीच वेब पत्रकारिता का जन्म हुआ. इंटरनेट बढ़ते समाचार पोर्टलों से वेब पत्रकारिता में योग्य पत्रकारों की मांग बनी रहती है.

जिस प्रकार अखबारों, पत्रिकाओं में खबरों के चयन, संपादन या लेखक होते हैं. यही कार्य इंटरनेट पर किया जाता है. हर व्यक्ति तेजी से खबरें चाहता है. युवाओं की भी पसंद इंटरनेट बनता जा रहा है.

पहले जहां इंटरनेट कम्प्यूटर तक सीमित था, वहीं नई तकनीकों से लैस मोबाइलों में भी इंटरनेट का चलन बढ़ता जा रहा. किसी भी जगह कहीं भी इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह वेब पत्रकारिता का ही कमाल है कि आप दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर किसी भी भाषा में किसी भी देश का अखबार या खबरें पढ़ सकते हैं. यहां कार्य में भी तेजी होनी चाहिए. खबर लिखकर उसका संपादन ही नहीं, बल्कि लगातार उसे अपडेट भी करना पड़ता है.

वेब पत्रकारिता में बहुत अधिक संभावनाएं हैं. इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए खबरों को समझकर उन्हें प्रस्तुत करने की कला, तकनीकी ज्ञान, भाषा पर अच्छी पकड़ होना आवश्यक है. न्यूज पोर्टल के रूप में स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाली साइटों की संख्या भारत में कम हैं.
ऐसी साइटों की संख्या ज्यादा है जो अपने वेब के लिए सामग्री अपने चैनलों या अखबारों से लेती हैं. स्वतंत्र न्यूज पोर्टल में वेब पत्रकार बनकर आप करियर बना सकते हैं. खेल, साहित्य, कला जैसी साइटों पर करियर की उज्जवल संभावनाएं रहती हैं. मास कम्यूनिकेशन या जर्नलिज्म में डिप्लोमा या डिग्री लेकर आप इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं.

प्रिंट मीडिया से यह इस रूप में भी भिन्न है क्योंकि इसके पाठकों की संख्या को परिसीमित नहीं किया जा सकता. इसकी उपलब्धता भी सार्वत्रिक है. इसके लिए मात्र इंटरनेट और कंप्यूटर, लैपटॉप, पॉमटॉप या अब मोबाईल की ही जरूरत होती है. इंटरनेट के ऐसा माध्यम से वेब-मीडिया सर्वव्यापकता को भी चरितार्थ करती है जिसमें ख़बरें दिन के चौबीसों घंटे और हफ़्ते के सातों दिन उपलब्ध रहती हैं. वेब पत्रकारिता की सबसे खासियत है उसका वेब यानी तंरगों पर घर होना. अर्थात् इसमें उपलब्ध किसी दैनिक, साप्ताहिक, मासिक पत्र-पत्रिका को सुरक्षित रखने के लिए किसी किसी आलमीरा या लायब्रेरी की जरूरत नहीं होती. समाचार पत्रों और टेलिविज़न की तुलना में इंटरनेट पत्रकारिता की उम्र बहुत कम है लेकिन उसका विस्तार तेज़ी से हुआ है. वाले दिनों में इसका विस्तार बेतार पत्रकारिता यानी वायरलेस पत्रकारिता में होगा जिसकी पहल कुछ मोबाइल कंपनियों द्वारा शुरू भी की जा चुकी है. वेब मीडिया या ऑनलाइन जर्नलिज्म परंपरागत पत्रकारिता से इन अर्थों में भिन्न है उसका सारा कारोबार ऑनलाइन यानी रियल टाइम होता है. ऑनलाइन पत्रकारिता में समय की भारी बचत होती है क्योंकि इसमें समाचार या पाठ्य सामग्री निरंतर अपडेट होती रहती है. इसमें एक साथ टेलिग्राफ़, टेलिविजन, टेलिटाइप और रेडियो आदि की तकनीकी दक्षता का उपयोग सम्भव होता है.

आर्काइव में पुरानी चीजें यथा मुद्रण सामग्री, फिल्म, आडियो जमा होती रहती हैं जिसे जब कभी सुविधानुसार पढ़ा जा सकता है. ऑनलाइन पत्रकारिता में मल्टीमीडिया का प्रयोग होता है जिसमें, टैक्स्ट, ग्राफिक्स, ध्वनि, संगीत, गतिमान वीडियो, थ्री-डी एनीमेशन, रेडियो ब्रोडकास्टिंग, टीव्ही टेलीकास्टिंग प्रमुख हैं. और यह सब ऑनलाइन होता है, यहाँ तक कि पाठकीय प्रतिक्रिया भी. कहने का वेब मीडिया में मतलब प्रस्तुतिकरण और प्रतिक्रियात्मक गतिविधि एवं सब कुछ ऑनलाइन होता है. परंपरागत प्रिंट मीडिया एट ए टाइम संपूर्ण संदर्भ पाठकों को उपलब्ध नहीं करा सकता किन्तु ऑनलाइन पत्रकारिता में वह भी संभव है.

युनिकोड ने बदला वेब-मीडिया का परिदृश्य

वेब मीडिया की लोकप्रियता-ग्राफ़ में गुणात्मक वृद्धि नहीं होने के पीछे अन्य कारणों के साथ फोंट की समस्य़ा भी रही है . शुरूआती दौर में इन अखबारों को पढ़ने के लिए यद्यपि हिंदी के पाठकों को अलग-अलग फ़ॉन्ट की आवश्यकता होती थी जिसे संबंधित अखबार के साइट से उस फ़ॉन्ट विशेष को चंद मिनटों में ही मुफ्त डाउनलोड़ और इंस्टाल करने की भी सुविधा दी जाती थी (गई है) . हिंदी फ़ॉन्ट की जटिल समस्या से हिंदी पाठकों को मुक्त करने के लिए शुरूआती समाधान के रूप में डायनामिक फ़ॉन्ट का भी प्रयोग किया जाता रहा है . डायनामिक फ़ॉन्ट ऐसा फ़ॉन्ट है जिसे उपयोगकर्ता द्वारा डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होती बल्कि संबंधित जाल-स्थल पर उपयोगकर्ता के पहुँचने से फ़ॉन्ट स्वयंमेव उसके कंप्यूटर में डाउनलोड हो जाता है . यह दीगर बात है कि उपयोगकर्ता उस फ़ॉन्ट में वहाँ टाइप नहीं कर सकता . अब युनिकोड़ित फोंट के विकास से वेब मीडिया में फोंट डाउनलोड़ करने की समस्य़ा लगभग समाप्त हो चुकी है . 

बड़े वेब पोर्टलों के साथ-साथ सभी वेबसाइट अपनी-अपनी सामग्री युनिकोड़ित हिंदी फोंट में परोसने लगे हैं किन्तु अभी भी अनेक ऐसे साइट हैं जो समय के साथ कदम मिलाकर चलने को तैयार नहीं दिखाई देतीं . दिन प्रतिदिन गतिशील हो रही वेबमीडिया की पाठकीयता (वरिष्ठ पत्रकार संजय द्विवेदी के शब्दों में दर्शनीयता ही सही) को बनाये रखने के लिए पाठक को फोंट डाउनलोड़ करने के लिए अब विवश नहीं किया जा सकता . क्योंकि अब वह विकल्पहीनता का शिकार नहीं रहा . पीड़ीएफ़ में सामग्री उपलब्ध कराना फोंट की समस्या से निजात पाने का सर्वश्रेष्ठ विकल्प या साधन नहीं है . भाषायी ऑनलाइन पत्रकारिता वास्तविक हल तकनीकी विकास से संभव हुआ युनिकोड़ित फोंट ही है जो अब सर्वत्र उपलब्ध है.